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  • 2025-07-18

Patna Firing: जेल से भी जिसने बिहार की सड़कों पर खौफ बोया, पटना के अस्पताल में हुआ दिनदहाड़े खून खराबा... अपराध जगत का मशहूर नाम चंदन मिश्रा का जानें इतिहास

Patna: राजधानी के एक नामी प्राइवेट अस्पताल में बुधवार को फिल्मी अंदाज़ में एक कुख्यात अपराधी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। पटना के पारस अस्पताल में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड से न केवल अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई, बल्कि पूरे बिहार में अपराध की दुनिया को लेकर चिंता गहरा गई है। मारा गया व्यक्ति कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि हत्या और अपहरण के दर्जनों मामलों में वांछित और उम्रकैद की सजा काट रहा कुख्यात गैंगस्टर चंदन मिश्रा था।


बक्सर का रहने वाला चंदन मिश्रा फिलहाल बेऊर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा था, लेकिन हाल ही में उसे स्वास्थ्य कारणों से पैरोल पर रिहा किया गया था। इसी दौरान उसे इलाज के लिए पटना के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन इस बात की भनक उसके दुश्मनों को लग गई। मौका पाकर बदमाशों ने अस्पताल में ही घुसकर उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।


राजेंद्र केसरी हत्याकांड में मिली थी उम्रकैद

चंदन मिश्रा का नाम सबसे पहले चर्चाओं में आया था साल 2011 में, जब 21 अगस्त को बक्सर के चूना कारोबारी राजेंद्र केसरी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में चंदन और उसके साथी शेरू सिंह को बंगाल से गिरफ्तार किया गया था। इस केस में चंदन को उम्रकैद और शेरू को फांसी की सजा मिली थी।

हत्या से पहले जेलकर्मी की हत्या का भी आरोपी

इस हत्याकांड से पहले चंदन और शेरू पर जेलकर्मी हैदर इमाम की हत्या का आरोप भी लग चुका था। यह वारदात धोबीघाट इलाके में हुई थी, लेकिन सबूतों के अभाव में दोनों को इस केस से बरी कर दिया गया। हालांकि, दोनों पर कई अन्य संगीन मामले अब भी दर्ज थे और वे जेल में रहते हुए भी आपराधिक नेटवर्क संचालित करते रहे।

जेल में रहते भी चलता रहा आतंक

2009 से 2012 के बीच चंदन और शेरू ने मिलकर डेढ़ दर्जन से ज्यादा आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया था। यहां तक कि जेल के भीतर रहते हुए भी इनके गिरोह का आतंक जारी रहा। 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा कारणों से दोनों को बक्सर से भागलपुर जेल शिफ्ट किया गया था।

अब सवाल ये, कौन था शूटर? और क्या गैंगवॉर की नई शुरुआत है?

चंदन मिश्रा की हत्या ने पटना की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान में दिनदहाड़े हुई यह हत्या पुलिस प्रशासन की विफलता को उजागर करती है। अब सवाल उठता है कि क्या यह एक गैंगवॉर की नई शुरुआत है या फिर किसी पुरानी दुश्मनी का खूनी अंत? पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन इस हत्याकांड ने बिहार में संगठित अपराध के गहरे नेटवर्क की एक बार फिर पुष्टि कर दी है।

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