Chaibasa: जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बड़ा घोटाला सामने आया है। लाखों रुपये की एक्सपायर दवाएं जलाई गई हैं, एक तरफ मरीजों को दवाइयां नहीं मिलना, वहीं दूसरी तरफ ज्यादा मात्रा में दवाइयां जालना, स्वास्थ्य केंद्र की पोल खोल रही है। हैरानी की बात है कि कई दवाओं के सील बंद कार्टन तक नहीं खोले गए थे और वे एक्सपायर हो गईं। केंद्र में शराब की बोतलें भी बड़ी संख्या में मिली हैं, जो स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ जयंत कुमार अक्सर नदारद रहते हैं। सिविल सर्जन के औचक निरीक्षण में वे दो बार अनुपस्थित पाए गए हैं, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय विधायक सोनाराम सिंकु ने डॉ जयंत कुमार को हटाने की मांग कई बार की है, लेकिन उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे विधायक काफी नाराज हैं।
जांच के लिए टीम गठित
सिविल सर्जन सुशांतो माझी ने जांच के लिए कमेटी गठित की है और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या सिविल सर्जन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे या जांच ठंडे बस्ते में जाएगी? जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति पश्चिमी सिंहभूम जिले के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं के एक्सपायर होने के पीछे कमीशन के खेल की भी संभावना जताई जा रही है। अधिकतर डॉक्टर ऐसी दवाएं लिखते हैं जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं होती हैं, जिससे मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। यह स्थिति मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रही है।
अस्पताल के निरीक्षण में पाया गया
शनिवार को अस्पताल के निरीक्षण में देखा गया कि कैंपस में ही दवाओं के करीब 10 से अधिक कार्टन जला दिए गए हैं। इन दवाओं का कार्टन खोला ही नहीं गया था और उन पर सील लगी हुई थी। इसके साथ ही अधिक संख्या में अन्य दवाएं भी जलाई गई हैं जो एक्सपायर हो गई थीं। अब सवाल यह है कि दवाएं एक्सपायर क्यों हो गईं? अगर मरीजों में दवाओं का वितरण किया गया होता तो ऐसा नहीं होता, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में जमकर मनमानी की है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रहे हैं और पारदर्शिता के लिए डिजिटलीकरण पर जोर दे रहे हैं, वहीं जगन्नाथपुर सीएचसी में इसके उलट हो रहा है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ जयंत कुमार द्वारा मौखिक रूप से तुगलूकी फरमान जारी कर ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन काम कराए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।