
उद्घाटन कार्यक्रम में छात्र छात्राओं के बीच स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया गया। जिले के सभी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा दी गई। वहीं, 19 सितंबर को मॉप अप राउंड चलाया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा दवा लेने से वंचित न रह जाए।
उपायुक्त ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्देश्य 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को कृमि संक्रमण से मुक्त करना है। कृमि संक्रमण से बच्चों में कुपोषण, खून की कमी और मानसिक शारीरिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों और आंगनबाड़ी सेविकाओं से अपील की कि वे अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और अभिभावकों को प्रेरित करें कि वे साल में दो बार बच्चों को यह दवा अवश्य दिलवाएं।
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और सभी बच्चों को नियमित रूप से दी जानी चाहिए। वहीं, डॉ. रंजीत पांडा ने बताया कि जिन बच्चों को स्कूल या आंगनबाड़ी केंद्रों पर दवा नहीं मिल पाई है, उन्हें स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें घर-घर जाकर दवा उपलब्ध कराएंगी।
उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि वे अपने बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा अवश्य दिलवाएं, क्योंकि शिक्षा और पोषण तभी सार्थक होंगे जब बच्चे स्वस्थ रहेंगे।