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  • 2025-10-05

Drishti IAS: विज्ञापन के माध्यम से सपने बेच रहे विकास दिव्यकीर्ति, CCPA ने लगाया 5 लाख का जुर्माना

Drishti IAS: अगर आप भी यूपीएससी की तैयारी करना चाह रहे है और इसके लिए एक कोचिंग संस्थान की तलाश में है तो यह रिपोर्ट आपको जरुर पढ़नी चाहिए. यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए कोचिंग का नाम ही उनकी उम्मीदों की दुनिया होता है. लेकिन जब वही संस्थान उम्मीदों के नाम पर झूठे सपने बेचने लगे तो सवाल उठना लाजमी है. दिल्ली के नामी कोचिंग संस्थान दृष्टि IAS पर एक बार फिर झूठे विज्ञापन का भंडाफोड़ हुआ है. अपने पढ़ाने की शैली को लेकर मशहूर विकास दिव्यकीर्ति की कंपनी दृष्टि IAS विवादों में आ गई है. बड़े बड़े दार्शनिकों की बात करते वाले विकास दिव्यकीर्ति अब बच्चों को अपने कंपनी के विज्ञापन के माध्यम से हवाई सपने बेचने का नया गोरखधंधा शुरू कर दिया है. 


केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने संस्थान पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. आरोप यह कि दृष्टि IAS ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 के नतीजों में दावा किया था कि उसके 216 से अधिक छात्र चुने गए हैं. लेकिन जांच ने कोचिंग संस्थान की पोल खोल दी.

लाखों की फीस और हवाई सपने

दृष्टि IAS  में उसके आधिकारिक वेबसाईट पर GS (P+M) IAS Foundation Batch + Test Series (P+M) का पैकेज है, जिसकी एकमुश्त फीस 1,15,000 रुपए और किस्तों में ली जाने वाली फीस 1,25,000 रुपए है. यानि बच्चों के करियर और सपनों पर लाखों का दांव. लेकिन इन भारी-भरकम फीस पैकेज के साथ जब विज्ञापन ऐसे हों जिनमें सच्चाई आधी-अधूरी या भ्रामक हो, तो यह सवाल खड़ा करता है कि क्या कोचिंग संस्थान “मार्केटिंग” के नाम पर सिर्फ सपनों का कारोबार कर रहे हैं?

जांच में निकली सच्चाई

CCPA की जांच में सामने आया कि दृष्टि IAS ने अपने विज्ञापन में सच छिपाया. जिन 216 उम्मीदवारों को चयनित बताकर दावा किया गया, उनमें से 162 उम्मीदवार (करीब 75%) तो सिर्फ फ्री इंटरव्यू प्रैक्टिस प्रोग्राम में शामिल हुए थे. असल में, सिर्फ 54 उम्मीदवारों ने संस्थान के वास्तविक कोर्स (IGP और अन्य पाठ्यक्रम) में दाखिला लिया था. यानि संस्थान ने इंटरव्यू प्रैक्टिस जैसे छोटे कार्यक्रमों को भी अपनी “सफलता की कहानी” में शामिल करके छात्रों और अभिभावकों के सामने झूठी तस्वीर पेश की.

पहले भी लग चुका है जुर्माना

यह पहला मौका नहीं है जब दृष्टि IAS ऐसे झूठे दावे करते पकड़ा गया हो. सितंबर 2024 में भी संस्थान पर भ्रामक विज्ञापन चलाने के लिए 3 रुपए लाख का जुर्माना लगाया गया था. तब संस्थान ने दावा किया था कि UPSC CSE 2021 में 150+ छात्र उनके यहां से चुने गए.

जांच में पाया गया कि 161 उम्मीदवारों की लिस्ट दी गई थी, लेकिन उनमें से 148 सिर्फ IGP प्रोग्राम में, 7 मेन्स मेंटरशिप में, 4 GS फाउंडेशन में और 1 वैकल्पिक पाठ्यक्रम में थे. एक उम्मीदवार का विवरण तो बिल्कुल ही नहीं था. चेतावनी और जुर्माने के बावजूद दृष्टि IAS ने 2022 के परिणामों पर भी उसी तरह का भ्रामक विज्ञापन किया.

कानून की नजर में भ्रामक विज्ञापन

PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, दृष्टि IAS ने जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई. इससे छात्रों और माता-पिता को यह विश्वास हुआ कि इन सभी उम्मीदवारों की सफलता का श्रेय संस्थान को ही जाता है. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के मुताबिक, यह पूरी तरह भ्रामक विज्ञापन है.

अब तक 54 संस्थानों पर कार्रवाई

CCPA अब तक 54 कोचिंग संस्थानों को भ्रामक विज्ञापनों के लिए नोटिस भेज चुका है. इनमें से 26 संस्थानों पर 90.6 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है. अधिकतर मामलों में कोचिंग संस्थानों ने विज्ञापनों में यह जानकारी छिपाई कि “सफल अभ्यर्थी किस कोर्स में नामांकित थे और कितनी अवधि तक पढ़े.” यानि सफलता की असली कहानी छात्रों की मेहनत थी, लेकिन उसे मार्केटिंग की चमक में बेच दिया गया.

सवाल साफ है, जब लाखों की फीस लेकर संस्थान झूठे विज्ञापन के सहारे छात्रों को “सपनों का कारोबार” बेचेंगे, तो अभ्यर्थी और उनके परिवार आखिर किस पर भरोसा करें?

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