Chandil: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन विभाग द्वारा आयोजित "रन फॉर गजराज मैराथन" के बाद जंगल में प्लास्टिक का अंबार लग गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने कार्यक्रम के बाद सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की, जिससे जंगल में प्लास्टिक और कचरे का ढेर बिखरा पड़ा है।
वन विभाग दिखावे के कार्यक्रमों के नाम पर जंगलों को कर रहा है प्रदूषित
ग्रामीण गुरुचरण कर्मकार ने बताया कि वन विभाग ने कार्यक्रम के आयोजन के बाद सफाई का कोई इंतजाम नहीं किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग दिखावे के कार्यक्रमों के नाम पर जंगलों को प्रदूषित कर रहा है और वन्य जीवों की जान खतरे में डाल रहा है।
वन विभाग इको-टूरिज्म को दे रहा है बढ़ावा
वन विभाग पर आरोप है कि इको सेंसिटिव ज़ोन के नाम पर स्थानीय आदिवासी परिवारों को घर बनाने से रोका जा रहा है, जबकि वन विभाग खुद जंगल काटकर इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या विभाग इन आरोपों की जांच करेगा, या फिर पर्यावरण संरक्षण की बातें सिर्फ कागज़ों पर ही सीमित रह जाएंगी।
सुरक्षित वातावरण है जरूरी
पर्यावरण का संरक्षण सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका पालन हर कार्यक्रम और गतिविधि में होना चाहिए। जंगलों और इको-सेंसिटिव ज़ोन में प्लास्टिक और कचरा फैलाना न केवल वन्य जीवों के जीवन के लिए खतरा है, बल्कि प्राकृतिक संतुलन को भी नुकसान पहुँचाता है। नागरिकों को पर्यावरण की सुरक्षा करनी चाहिए, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण मिल सके।