Aviation Sector: भारत में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) केंद्रों में कर्मियों की भारी कमी एक गंभीर सुरक्षा चिंता के रूप में उभर रही है. देश में तेजी से बढ़ती हवाई यातायात व्यवस्था और नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के संचालन की तैयारी के बीच यह संकट और भी गहराने की आशंका है. नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन और नोएडा के जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के जल्द शुरू होने से मौजूदा हालात पर दबाव और बढ़ेगा.
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एटीसी अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 5,337 है, लेकिन फिलहाल 1,613 पद खाली पड़े हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बढ़ते हवाई मार्गों और उड़ानों की संख्या को देखते हुए एटीसी अधिकारियों की कम से कम 8,000 की आवश्यकता होगी. यह कमी न केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि मौजूदा अधिकारियों की मानसिक और शारीरिक क्षमता पर भी गंभीर प्रभाव डाल रही है.
एटीसी सेवाएं चौबीसों घंटे संचालित होती हैं, जहां जरा सी लापरवाही भी दुर्घटना में बदल सकती है. 2019 तक एटीसी अधिकारियों पर फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) के नियम लागू नहीं थे, जिसके कारण उन्हें लंबे घंटों तक ड्यूटी करनी पड़ती थी. अत्यधिक थकान और लगातार दबाव के बीच काम करने से मानवीय भूल की संभावना बढ़ जाती है, जो हवाई सुरक्षा के लिए विनाशकारी हो सकती है.
प्रशिक्षण संरचना की कमी भी इस संकट को और मुश्किल बनाती है. पूरे देश में फिलहाल केवल तीन प्रशिक्षण केंद्र ही संचालित हो रहे हैं, जबकि देश भर में दर्जनों हवाई अड्डों और बढ़ती उड़ानों को संचालित करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता है. एटीसी सेवाओं का संचालन मुख्य रूप से दो खंडों में बंटा होता है, एयर नेविगेशन सर्विसेज और कम्युनिकेशन-नेविगेशन सर्विसेज. दोनों इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय के बिना विमान परिचालन, संचार, नेविगेशन और निगरानी जैसे अहम कार्य सुचारू रूप से नहीं चल सकते.
एक अन्य बड़ी समस्या है वेतन और कार्य परिस्थितियां. सरकारी नौकरी होने के बावजूद एटीसी अधिकारियों का कार्यभार बहुत भारी होता है, लेकिन वेतन अपेक्षाकृत कम है. जहां एक एटीसी अधिकारी एक समय में 15 से 20 विमानों की निगरानी करता है, वहीं एक पायलट केवल एक विमान संभालता है. इसके बावजूद नए एटीसी अधिकारी को लगभग 60,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि पायलट अपने करियर की शुरुआत में ही लगभग ढाई लाख रुपये तक कमा लेते हैं. यही कारण है कि युवाओं के लिए यह क्षेत्र उतना आकर्षक नहीं रह गया है, जितना इसकी आवश्यकता है.
एएआई ने हालांकि इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विमानन क्षेत्र से जुड़े जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तुरंत और ठोस हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो एटीसी कर्मियों की यह कमी एक बड़े संकट में बदल सकती है. लगातार बढ़ती उड़ानों और यात्रियों की संख्या के बीच एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम पर दबाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है.
अगर समय रहते भर्ती, प्रशिक्षण और वेतन ढांचे में सुधार नहीं किया गया, तो भारत की विमानन व्यवस्था उस मोड़ पर पहुंच सकती है जहां तकनीकी गलती या मानवीय चूक से किसी बड़े हादसे को टाल पाना मुश्किल होगा. हवाई यात्रा भले ही विकास और आधुनिकता का प्रतीक मानी जाती हो, लेकिन इसकी रीढ़, “एयर ट्रैफिक कंट्रोल” अगर कमजोर पड़ गई, तो पूरा ढांचा जोखिम में आ सकता है.