Jamshedpur News: नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) की जिला टीम ने साकची मुख्य गोलचक्कर से आम बागान जाने वाली सड़क पर ट्रैफिक चेकिंग की औचक जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. टीम को पता चला कि वहां तैनात पुलिसकर्मी बिना किसी अधिकृत चेक नाका के वाहनों को रोककर जुर्माना वसूल रहे हैं. वे पास ही स्थित बालानंद तीर्थश्रम में बैठकर यह कार्रवाई कर रहे थे. नियमों के मुताबिक किसी भी चेकिंग पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरा या बॉडी कैमरा अनिवार्य है लेकिन निरीक्षण में न तो पुलिसकर्मियों ने बॉडी कैमरा पहना था और न ही आसपास कोई सीसीटीवी लगा हुआ था. यह ट्रैफिक नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है.
वह सड़क एकतरफा है मगर प्रशासन द्वारा लगाया गया बोर्ड पेट्रोल पंप से सटा होने के कारण वाहन चालकों की नजर से ओझल रहता है. चेक पोस्ट पर लगा बैरिकेड, जिसमें कार और तिपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लिखा है उसे स्थानीय ऑटो चालक खुद ही ढक देते हैं जिससे कार चालकों को जानकारी नहीं मिल पाती. इसके बाद पुलिसकर्मी उनसे मनमाने ढंग से वसूली करते हैं. टीम ने मौके पर तैनात एसआई बिनोद ओरांव, सिपाही संजीव कुमार सिंह और सिपाही सुधीर कुमार से बात की तो उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास न बॉडी कैमरा है और न ही सीसीटीवी की कोई व्यवस्था. ज्यादा जानकारी के लिए एसआई ने साकची ट्रैफिक थाना प्रभारी से संपर्क करने को कहा.

नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की इस औचक जांच ने जमशेदपुर ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. साकची जैसे व्यस्त इलाके में बिना अधिकृत चेक नाका, बिना सीसीटीवी और बिना बॉडी कैमरा के चेकिंग करना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह वाहन चालकों के साथ धोखाधड़ी का स्पष्ट मामला है. एकतरफा सड़क का बोर्ड छिपा होना और बैरिकेड को ऑटो चालकों द्वारा ढकना यह दर्शाता है कि पूरी व्यवस्था सुनियोजित तरीके से वसूली के लिए बनाई गई है. पुलिसकर्मियों का खुलकर स्वीकार करना कि उनके पास कोई तकनीकी उपकरण नहीं है यह बात और गंभीर हो जाती है. यह मामला केवल स्थानीय स्तर की लापरवाही नहीं बल्कि ट्रैफिक पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है. यदि उच्च अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई नहीं की तो आम नागरिकों का पुलिस पर से विश्वास उठना स्वाभाविक है. एनएचआरसीसीबी की इस रिपोर्ट के बाद ट्रैफिक थाना प्रभारी पर दबाव बढ़ेगा और शायद बड़े स्तर पर सुधार की शुरुआत हो.