मिली जानकारी के अनुसार, गुप्ता की सेवानिवृत्ति के बाद
मिली जानकारी के अनुसार, गुप्ता की सेवानिवृत्ति के बाद की गई डीजीपी पद पर नियुक्ति पर केंद्र सरकार ने सख्त आपत्ति जताई थी, जिसे लेकर राज्य और केंद्र के बीच तकरार चल रही थी। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने भी इस नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके कारण सरकार पर दबाव बढ़ गया था। माना जा रहा है कि बढ़ते विवाद और दबाव को कम करने के लिए ही गुप्ता ने यह कदम उठाया है।
सीपी सिंह का तीखा तंज
इस घटनाक्रम पर राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक सीपी सिंह ने डीजीपी के इस्तीफे पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा, "यह स्वागत योग्य है—देर आए दुरुस्त आए।
सिंह ने आगे कहा कि डीजीपी का पद इतना बड़ा होता
सिंह ने आगे कहा कि डीजीपी का पद इतना बड़ा होता है कि इसमें बैठे अधिकारी करोड़ों रुपये कमा सकते हैं, लेकिन डील में गड़बड़ी होने पर फजीहत भी हो सकती है। उनके इस बयान ने भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हुए मामले को और अधिक विवादास्पद बना दिया है। फिलहाल, सबकी निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस इस्तीफे को स्वीकार करते हैं या नहीं, और अगला पुलिस प्रमुख कौन होगा।