National News: भारत अब व्हिस्की पीने में दुनिया का नंबर वन देश बन गया है. ग्लोबल अल्कोहल रिसर्च फर्म आईडब्ल्यूएसआर की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने शराब की खपत के मामले में चीन, अमेरिका, ब्राजील, रूस और कई अन्य देशों को पीछे छोड़ दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने लगातार तीसरी छमाही में टोटल बेवरेज अल्कोहल यानी टीबीए की खपत में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की है.
आईडब्ल्यूएसआर के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से जून 2025 के बीच भारत में टीबीए की खपत साल-दर-साल सात फीसदी बढ़कर 440 मिलियन नौ लीटर केस से अधिक हो गई. आईडब्ल्यूएसआर के मानक के अनुसार एक नौ लीटर केस में 12 बोतलें होती हैं जिनमें प्रत्येक 750 मिलीलीटर की होती है.
स्पिरिट सेक्टर की बात करें तो भारतीय व्हिस्की ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है. व्हिस्की की खपत सात फीसदी बढ़कर 130 मिलियन 9 लीटर केस तक पहुंच गई. इसी अवधि में वोडका में दस फीसदी, रम में दो फीसदी और जिन तथा जेनेवर में तीन फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.
आईडब्ल्यूएसआर की एशिया-पैसिफिक रिसर्च हेड सारा कैंपबेल ने कहना है कि भारतीय व्हिस्की देश के स्पिरिट सेक्टर की कोर ग्रोथ इंजन बनी हुई है. उन्होंने बताया कि बेहतर क्वालिटी, बढ़ता उपभोक्ता वर्ग और मजबूत आर्थिक हालात इस ग्रोथ के मुख्य कारण हैं. उन्होंने कहा कि उच्च मूल्य वाली स्पिरिट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है जो घरेलू डिस्टिलर्स के स्तर और गुणवत्ता में सुधार को दर्शाती है.
आईडब्ल्यूएसआर की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने जिन 20 प्रमुख वैश्विक बाजारों को पीछे छोड़ा है उनमें चीन, अमेरिका, ब्राजील, रूस, मेक्सिको, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, इटली, फ्रांस, पोलैंड, फिलीपींस, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया और नीदरलैंड शामिल हैं.
रिपोर्ट के अनुसार भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा अल्कोहल मार्केट बनने की राह पर है. आईडब्ल्यूएसआर के पूर्वानुमान के मुताबिक भारत 2027 तक जापान को और 2033 तक जर्मनी को पीछे छोड़ सकता है. फिलहाल जिन चार देशों के आगे रहने का अनुमान है वे हैं चीन, अमेरिका, ब्राजील और मेक्सिको.
2025 की पहली छमाही में भारत में प्रीमियम और उससे ऊपर की अल्कोहल कैटेगरीज में वॉल्यूम और वैल्यू दोनों में आठ फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. रेडी टू ड्रिंक बेवरेजेस में सबसे ज्यादा 11 फीसदी की ग्रोथ रही जबकि बीयर में सात फीसदी और स्पिरिट्स में छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं वाइन की ग्रोथ स्थिर रही.
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी व्हिस्की में दस फीसदी की गिरावट आई है जबकि आयरिश व्हिस्की में 23 फीसदी और एगेव बेस्ड स्पिरिट्स में 19 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. कैंपबेल ने कहा कि भारत अब ग्लोबल बेवरेज इंडस्ट्री के लिए एक अहम मार्केट बनता जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत में सभी कैटेगरीज में स्थिर मांग और प्रीमियम ब्रांड्स के प्रति झुकाव लगातार बढ़ रहा है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्कॉच माल्ट ने भारतीय सिंगल माल्ट की तुलना में थोड़ी बढ़त हासिल की है. वहीं ब्लेंडेड स्कॉच स्थिर रही है. ब्रांडी सेगमेंट में दक्षिणी राज्यों में फ्लेवर्ड वैरिएंट्स और कंसोलिडेशन बढ़ा है. फ्लेवर्ड वोडका की लोकप्रियता में भी इजाफा देखने को मिला है.
भारत में शराब की खपत का बढ़ना केवल उपभोग की आदतों में बदलाव नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकेतक भी है. बढ़ती आमदनी, बदलती जीवनशैली और शहरीकरण ने इस ट्रेंड को और तेज किया है. खास बात यह है कि वाइन या बीयर नहीं बल्कि व्हिस्की जैसे हाई स्पिरिट ड्रिंक में भारत का दबदबा बना हुआ है. यह प्रवृत्ति देश में प्रीमियम ब्रांड्स की स्वीकृति और शराब उद्योग के विस्तार की ओर इशारा करती है. हालांकि यह भी सच है कि इस बढ़ती खपत के साथ स्वास्थ्य, नशा नीति और सामाजिक संतुलन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. भारत को अब इस क्षेत्र में नियमन और जनजागरूकता दोनों पर समान रूप से ध्यान देना होगा.