Jharkhand News: झारखंड लोक सेवा आयोग ने झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) 2024 को लेकर एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है. आयोग ने परीक्षा में 15 नये एलाइड विषयों को शामिल किया है. इसके साथ ही फॉर्म भरने की अंतिम तिथि भी बढ़ा दी गई है. अब अभ्यर्थी एक दिसंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. वहीं परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि दो दिसंबर 2025 तय की गई है. अभ्यर्थी तीन से पांच दिसंबर 2025 के बीच अपने फॉर्म में संशोधन कर सकेंगे.
आयोग की नई अधिसूचना के अनुसार कोर विषय लाइफ साइंस (कोड 703) के अंतर्गत एलाइड विषय के रूप में बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी इन लाइफ साइंस, बायोइंफॉर्मेटिक्स, लाइफ साइंस बायोकेमिस्ट्री और बायोसाइंस को जोड़ा गया है. इतिहास (कोड 06) के अंतर्गत आर्कियोलॉजी को एलाइड विषय के रूप में शामिल किया गया है. वहीं लेबर एंड सोशल वेलफेयर (सोशल वर्क) (कोड 55) में रूरल डेवलपमेंट को जोड़ा गया है.
होम साइंस (कोड 12) के अंतर्गत एलाइड विषय के रूप में सीएनडी, टेक्सटाइल एंड फैशन डिजाइनिंग को शामिल किया गया है. फिजिकल साइंस (फिजिक्स) (कोड 705) में इलेक्ट्रॉनिक्स साइंस को एलाइड विषय के तौर पर जोड़ा गया है. इसी तरह भूगर्भशास्त्र (कोड 702) में जियोफिजिक्स इन अर्थ, एटमॉसफेरिक, ओसिएन एंड प्लानेटरी साइंस को शामिल किया गया है. परफॉर्मिंग आर्ट्स (डांस, ड्रामा, थिएटर) (कोड 65) में थिएटर आर्ट और कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन (कोड 87) में कंप्यूटर एप्लीकेशन को भी जोड़ा गया है.
आयोग ने नये विषयों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. इसमें कहा गया है कि एलाइड विषय के अभ्यर्थी संबंधित कोर विषयों में सीएसआईआर-यूजीसी या यूजीसी नेट के अनुसार परीक्षा देने की पात्रता रखते हैं. इसके अलावा अन्य राज्य के विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों द्वारा चिह्नित एलाइड विषयों के आधार पर भी अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे.
जो अभ्यर्थी पहले ही आवेदन कर चुके हैं, वे एलाइड विषय के अनुसार अपने फॉर्म में संशोधन कर सकते हैं. इसके लिए आयोग ने तीन से पांच दिसंबर तक संशोधन विंडो उपलब्ध कराने की घोषणा की है.
जेट 2024 में नये विषयों का जोड़ा जाना आयोग की दूरदृष्टि और व्यापकता को दर्शाता है. इससे अधिक विषयों के अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा और शिक्षण क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले उम्मीदवारों की भागीदारी भी बढ़ेगी. वहीं फॉर्म की तिथि बढ़ाने से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी जो अब तक आवेदन नहीं कर पाए थे. आयोग का यह कदम पारदर्शिता और समावेशिता की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास कहा जा सकता है.