Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट में बुधवार को जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी के कमांड क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. यह याचिका राकेश कुमार झा की ओर से दाखिल की गई थी. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जेएनएसी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पहले दिए गए आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है.
चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि जेएनएसी अपने क्षेत्र में विचलन किए गए और अवैध भवनों की विस्तृत जानकारी टेबुलर चार्ट के रूप में प्रस्तुत करे. इस चार्ट में यह बताना था कि कितने भवन नियमों का उल्लंघन करते हुए बनाए गए हैं, कितनों पर कार्रवाई की गई है, कितने भवन तोड़े गए हैं, कितनों को नोटिस जारी हुआ है और कितनों पर कार्रवाई लंबित है. लेकिन जेएनएसी इस दिशा में कोई ठोस जानकारी कोर्ट को नहीं दे सकी.
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए जेएनएसी को दोबारा आदेश दिया कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन करे और नया टेबुलर चार्ट पेश करे. अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी. सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता नेहा अग्रवाल और वरीय अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने पक्ष रखा जबकि जेएनएसी की ओर से अधिवक्ता कृष्ण कुमार ने पक्ष रखा.
प्रार्थी का कहना है कि जेएनएसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण जारी है और प्रशासन इन पर रोक लगाने या कार्रवाई करने में नाकाम रहा है. उन्होंने मांग की थी कि सभी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर ध्वस्त किया जाए और भविष्य में इस तरह के निर्माण पर सख्त रोक लगाई जाए.
यह मामला सिर्फ एक जनहित याचिका तक सीमित नहीं है बल्कि यह नगर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाता है. कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यह भी स्पष्ट है कि जेएनएसी अपने ही क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माणों पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा है. अगर आने वाली सुनवाई तक ठोस जवाब नहीं दिया गया तो कोर्ट की अगली कार्रवाई सख्त हो सकती है. यह मामला न केवल जमशेदपुर बल्कि राज्य के शहरी प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है.