Jamshedpur Big News: जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना अंतर्गत विजया गार्डन के रहने वाले एसएसबी जवान अखिलेश कुमार गिरी ने शहर के सैंकड़ों लोगों को करीब 70 से 72 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया. एक लाख लगाओ हर महीने 10 हजार पाओ का लालच देकर अखिलेश ने निवेश का जाल बिछाया. दो महीने तक रिटर्न देकर विश्वास जीता फिर सब बंद कर भागने की फिराक में था. लोगों ने उसे आलोक विहार सोसाइटी के कोयल अपार्टमेंट से पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया.
भुक्तभोगियों ने बताया कि अखिलेश ने पहले दोस्तों को फंसाया फिर वे नए लोग लाए. अच्छे निवेशक लाने वाले को गाड़ी फाइनेंस करवाई और दो-तीन महीने की ईएमआई भी भरी. फिर अचानक सब बंद. संतोष कुमार ने 30 लाख रुपये लगाए थे, जब पैसा मांगने पहुंचे तो पता चला कि अखिलेश पत्नी रौशनी गिरी और साले के साथ भागने वाला था. शैलेश नाम के एक व्यक्ति ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंप दिया.
पुलिस ने दो दिन से अखिलेश को थाने में रखा है और सभी पीड़ितों का बयान लिया. लोग कहते हैं कि उसके 15 से 16 बैंक खाते हैं लेकिन रिकॉर्ड सिर्फ ऑनलाइन ट्रांसफर का है. कैश में दिए पैसे का कोई हिसाब नहीं. पुलिस ने कहा है कि कैश का प्रमाण नहीं तो पैसा वापस मिलना कठिन. पीड़ितों ने बताया कि अखिलेश गिरी सभी को अपने घर बुलाता था, अपनी लग्जीरियस लाइफस्टाइल दिखाता था और लोगों से कहता था कि आपके पैसों को एक कंपनी में निवेश किया जाएगा. क्योंकि लोग उसके जान-पहचान के ही होते थे और उसकी लग्जीरियस लाइफस्टाइल और उसके घर पर खड़ी करोड़ो की कार और बाइक देखकर उस पर विश्वास कर लेते थे. पीड़ित गुस्से में हैं कि अखिलेश के परिवार के खाते लैपटॉप की जांच क्यों नहीं हो रही. अब उसे जेल भेजने की तैयारी है लेकिन पीआर बॉन्ड पर छूटने की आशंका से भुक्तभोगी फिर पकड़ने की धमकी दे रहे हैं.
जमशेदपुर में यह 70 करोड़ की ठगी नकली स्कीम का सबसे बड़ा उदाहरण है जहां एसएसबी जवान ने नौकरी और दोस्ती का नाजायज फायदा उठाया. दो महीने रिटर्न देकर जाल बिछाना क्लासिक तरीका था. पुलिस ने उसे थाने में रखकर बयान लेना सही कदम है लेकिन परिवार के खातों और लैपटॉप की जांच न होना शक पैदा करता है. कैश में लिए पैसे का रिकॉर्ड न होने से ज्यादातर पीड़ित बर्बाद हो जाएंगे. यह मामला लालच के खतरे की सीख है. पुलिस को जल्द चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए वरना आरोपी बाहर आकर फिर धंधा चला सकता है. पीड़ितों को एकजुट होकर कोर्ट जाना चाहिए ताकि जांच पारदर्शी बने.