National News: लोकतंत्र ऐसे चलता है कहकर कांग्रेस नेता शशि थरूर के बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है. अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के बीच हुई मुलाकात को उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवहार की मिसाल बताया है. चुनाव प्रचार के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखे हमले हुए थे लेकिन परिणाम आने के बाद दोनों ने व्हाइट हाउस में मिलकर सौहार्द का संदेश दिया. थरूर ने इस मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि चुनाव पूरी ताकत से लड़िए लेकिन नतीजों के बाद देशहित में साथ काम कीजिए और काश भारत में भी ऐसा देखने को मिलता.
थरूर के बयान पर भाजपा ने तुरंत किया पलटवार
थरूर के इस पोस्ट के तुरंत बाद भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर ले लिया. भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने टिप्पणी की कि इस सलाह की सबसे अधिक जरूरत राहुल गांधी को है और कांग्रेस को भी इसी भावना को अपनाना चाहिए. उनके अनुसार कांग्रेस नेतृत्व लगातार टकराव की राजनीति कर रहा है और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन नहीं करता. इस प्रतिक्रिया ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है.
पार्टी लाइन से अलग राय रखते है शशि थरूर
शशि थरूर पिछले कुछ समय से कई मुद्दों पर पार्टी लाइन से अलग राय रखते दिखाई दिए हैं. 18 नवंबर को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में दिए गए भाषण की सराहना की थी जिस पर कांग्रेस के भीतर सवाल उठे थे. संदीप दीक्षित ने पूछा था कि यदि वे भाजपा की नीतियों से सहमत हैं तो कांग्रेस में क्यों बने हुए हैं. कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी कहा था कि प्रधानमंत्री के भाषण की तारीफ का उन्हें कोई कारण दिखाई नहीं देता.
आडवाणी की भी की थी तारीफ
इसी महीने की शुरुआत में भी थरूर चर्चा में आए थे जब उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तारीफ की थी. कांग्रेस ने उस समय स्पष्ट किया था कि थरूर के विचार निजी हैं और यह पार्टी की लोकतांत्रिक परंपरा को दर्शाता है. आडवाणी को जन्मदिन की बधाई देने पर उठे विवाद के जवाब में थरूर ने कहा था कि किसी भी राजनीतिक करियर को केवल एक घटना से नहीं आंका जा सकता. उन्होंने उदाहरण दिया था कि नेहरू को केवल चीन युद्ध से और इंदिरा गांधी को केवल आपातकाल से नहीं आंका जा सकता ठीक उसी तरह आडवाणी को भी एक घटना से नहीं बांधा जा सकता.
थरूर के लगातार स्वतंत्र विचार कांग्रेस की आंतरिक संरचना और विचारधारा की लचीलापन पर सवाल उठाते हैं. भाजपा की प्रतिक्रिया स्वाभाविक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है जो कांग्रेस नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करती है. थरूर का रुख उन्हें उदारवादी और स्वतंत्र दृष्टिकोण वाला नेता दिखाता है लेकिन यह कांग्रेस के भीतर असहजता भी बढ़ा रहा है और आने वाले समय में यह पार्टी के भीतर असंतुलन का कारण बन सकता है.