Meta Description
Jharkhand: केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर बुधवार को झारखंड के छह शहरों-रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा, साहिबगंज और गोमिया में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य युद्ध जैसे हालात, जैसे हवाई हमला, ड्रोन अटैक, आगजनी या विस्फोट की स्थिति में नागरिकों और प्रशासन की तैयारियों का परीक्षण करना था। मॉक ड्रिल की शुरुआत सायरन बजाकर की गई और समापन शाम को ब्लैकआउट (लाइटें बंद) कर दिया गया।
राजधानी रांची में यह अभ्यास शाम चार बजे डोरंडा क्षेत्र स्थित मेकॉन लिमिटेड के कार्यालय से शुरू हुआ, जहां हमले की सूचना प्रसारित की गई। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और घायल लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने का अभ्यास किया गया। इस दौरान एनडीआरएफ के जवानों और एनसीसी कैडेट्स ने सक्रिय भूमिका निभाई। शाम सात बजे पूरे क्षेत्र की बिजली बंद कर दी गई और ब्लैकआउट के माध्यम से लोगों को अंधेरे में सुरक्षित रहने की रणनीति सिखाई गई। इस पूरी मॉक ड्रिल की निगरानी उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी सह डीआईजी चंदन कुमार सिन्हा ने की।बोकारो में बीएसएल (बोकारो स्टील लिमिटेड), नगर प्रशासन भवन और गोमिया स्थित इंडियन एक्सप्लोसिव लिमिटेड (IEL) प्लांट में मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक की गई। एमजीएम हायर सेकेंडरी स्कूल में सायरन बजते ही छात्रों को बचाव के तरीके सिखाए गए। सायरन के बाद पटाखों के धमाके से आपात स्थिति का संकेत दिया गया, जिस पर त्वरित प्रतिक्रिया करते हुए फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस को बुलाया गया और घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया गया।
गोड्डा जिले में अदाणी पावर प्लांट परिसर में तीन चरणों में मॉक ड्रिल की गई। पहले चरण में कर्मचारियों को सायरन बजाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। दूसरे चरण में आग लगने की काल्पनिक घटना पर फायर ब्रिगेड ने काबू पाने का प्रदर्शन किया। तीसरे चरण में गंभीर रूप से घायल लोगों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया। इस अभ्यास में सिक्योरिटी हेड सुब्रत देवनाथ और सेफ्टी हेड रणधीर कुमार ने कर्मचारियों को आपात स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। स्टेशन हेड प्रसून चक्रवर्ती ने कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल से कर्मचारियों में सतर्कता आती है और जान-माल की रक्षा सुनिश्चित होती है।
जमशेदपुर और साहिबगंज में भी इसी तरह की मॉक ड्रिल जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की देखरेख में की गई। आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, फैक्ट्रियों, प्रशासनिक कार्यालयों और रेस्क्यू एजेंसियों ने मिलकर इस अभ्यास में भाग लिया। पूरे अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह था कि अगर देश में कभी युद्ध या आतंकी हमला हो, तो सरकारी एजेंसियां, सुरक्षाकर्मी और आम लोग मिलकर किस हद तक प्रभावी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में केंद्र सरकार ने देशभर में ऑपरेशन अभ्यास के तहत मॉक ड्रिल करवाकर आपात स्थितियों के लिए अपनी तैयारियों को परखा। झारखंड में यह मॉक ड्रिल पूरी तरह सफल रही और सभी छह शहरों ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया।