नियुक्ति के बाद उनका सर्विस बुक खोला गया
नियुक्ति के बाद उनका सर्विस बुक खोला गया और उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन भी दिया गया। याचिका में कहा गया कि नियुक्ति के लगभग एक वर्ष बाद सरकार ने कर्मचारियों को एक महीने का नोटिस देकर सेवा समाप्त कर दी। इसके बाद जनवरी 2018 से उन्हें दैनिक वेतन भोगी श्रमिक के रूप में काम कराया जाने लगा।
इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कर्मचारियों
इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कर्मचारियों ने 2017 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने यह दलील दी कि इन पदों पर नियुक्ति संविदा आधार पर की जानी थी, लेकिन विभागीय त्रुटि के कारण गलती से नियमित कर्मचारियों की तरह सर्विस बुक खोल दी गई। चूक का पता चलते ही नोटिस जारी कर सेवा समाप्त कर दी गई।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया
वहीं, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि नियुक्ति विधि सम्मत प्रक्रिया से हुई थी, सार्वजनिक विज्ञापन के आधार पर चयन किया गया था और पूरा लाभ नियमित कर्मचारियों जैसा दिया गया।
सरकारी गलती के लिए कर्मचारियों को दंडित
सरकारी गलती के लिए कर्मचारियों को दंडित नहीं किया जा सकता। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका खोलना, वेतन देना और नियमित कर्मचारियों की तरह व्यवहार करना यह दर्शाता है कि उनकी सेवाएं स्वीकार की गई थीं। ऐसी स्थिति में विभागीय त्रुटि को आधार बनाकर सेवा समाप्त करना न्यायसंगत नहीं है।