Jamshedpur News: झारखंड की बागबेड़ा जलापूर्ति योजना की धीमी प्रगति को लेकर सांसद बिधुत बरन महतो ने लोकसभा में गंभीर मुद्दा उठाया है. सांसद ने कहा कि वर्ष 2014 से 2019 के बीच केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी में बागबेड़ा और गोविंदपुर जलापूर्ति योजनाएं शुरू की गई थीं. इनमें गोविंदपुर योजना पूरी हो चुकी है, लेकिन बागबेड़ा योजना, जो पहले शुरू हुई थी, अभी भी लगभग 40 प्रतिशत अधूरी है.
सांसद ने बताया कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन झारखंड में इस मिशन की रफ्तार संतोषजनक नहीं है. पाइपलाइन बिछाने से लेकर पंप हाउस निर्माण और जलापूर्ति परीक्षण तक के कई काम महीनों से रुके हुए हैं. कई ग्रामीण अभी भी दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि केंद्र सरकार ने आवश्यक वित्तीय संसाधन पहले ही उपलब्ध करा दिए हैं.
उन्होंने कहा कि झारखंड के लाखों ग्रामीण परिवार अभी भी पेयजल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे हैं. सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बागबेड़ा जलापूर्ति योजना की प्रगति को प्राथमिकता दी जाए और यदि योजना से संबंधित कोई वित्तीय सहायता लंबित है तो उसे जल्द जारी किया जाए, ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके और जनता को राहत मिल सके.
बागबेड़ा जलापूर्ति योजना की देरी झारखंड में चल रही पेयजल योजनाओं की जमीनी चुनौतियों को उजागर करती है. फंड उपलब्ध होने के बावजूद काम का धीमा पड़ना प्रशासनिक तालमेल की कमी और निगरानी तंत्र की कमजोरियों की ओर संकेत देता है. ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत लगातार गंभीर हो रही है और अधूरी योजनाएं समस्या को और बढ़ा देती हैं. यह मामला केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर तेज कार्रवाई की जरूरत का स्पष्ट संदेश देता है.