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  • 2025-12-06

Jharkhand News: विनय सिंह के पक्ष में म्यूटेशन करने के लिए IAS विनय चौबे ने तत्कालीन अंचल अधिकारी पर डाला था दबाव

Jharkhand News: हजारीबाग भूमि घोटाला मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने नेक्सजेन के मालिक विनय सिंह की जमानत याचिका को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि यह मामला विनय सिंह और विनय चौबे की योजनाबद्ध धोखाधड़ी का स्पष्ट उदाहरण है. निजी स्वार्थ के लिए सरकारी अधिकारों का इस्तेमाल अत्यधिक गंभीर अपराध है और इससे समाज के नैतिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचता है.

जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से बताया गया कि यह मामला सिर्फ जमीन विवाद तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, दस्तावेजों में जालसाजी और संगठित आपराधिक गतिविधियों के तत्व मौजूद हैं. जांच के दौरान तत्कालीन अंचल अधिकारी अलका कुमारी ने स्वीकार किया कि उन्हें तत्कालीन उपायुक्त (विनय चौबे) ने बुलाकर विनय सिंह के पक्ष में म्यूटेशन करने के लिए दबाव डाला था. एसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि विनय चौबे और उनके परिजनों के बैंक खातों में विनय सिंह की कंपनी से बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी.

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि पहली नजर में यह मामला गंभीर और सोची समझी प्रक्रिया के तहत की गई धोखाधड़ी लगता है. कोर्ट ने यह भी माना कि यह सिर्फ व्यक्तिगत लाभ का मुद्दा नहीं बल्कि शासन तंत्र और कानूनी प्रक्रिया के सुनियोजित दुरुपयोग का भी मामला है. आर्थिक अपराधों के माध्यम से सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग राष्ट्र की वित्तीय सेहत के लिए सीधे खतरे के रूप में देखा गया है.

हाईकोर्ट ने एसीबी द्वारा पेश किए गए मनी ट्रेल और बैंकिंग लेनदेन के डिजिटल सबूतों को विश्वसनीय माना है. आरोपी और अन्य संबंधित लोगों के बीच आर्थिक संबंध और आपराधिक कड़ी इन सबूतों से प्रमाणित होती है. कोर्ट ने दस्तावेजों में जालसाजी और डिजिटल डेटा मिटाने के प्रयासों से जुड़े सबूतों को भी स्वीकार किया. अदालत ने आशंका जताई कि अगर अभियुक्त को जमानत दी गई तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है. इसी आधार पर जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया.

हजारीबाग भूमि घोटाला केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि यह दिखाता है कि कैसे सत्ता और प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रशासनिक प्रक्रिया को मोड़ा जा सकता है. कोर्ट का फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि न्यायपालिका इन मामलों को सिर्फ आर्थिक अपराध के रूप में नहीं बल्कि सिस्टम पर होने वाले हमले के रूप में देख रही है. यह केस प्रशासनिक जवाबदेही और जांच एजेंसियों की भूमिका को और मजबूत करने वाले उदाहरण के रूप में उभर रहा है.
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