धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित
साउथ ईस्टर्न रेलवे मुहर्रम अखाड़ा कमेटी के लाइसेंसधारी शेख सलाउद्दीन ने बताया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण इसी मैदान से हर वर्ष मुहर्रम का अखाड़ा निकाला जाता है. इसके अलावा ख्वाजा साहब का उर्स भी इसी मैदान में आयोजित होता है. साथ ही शादी- विवाह,खेलकूद और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी इस मैदान का नियमित उपयोग किया जाता रहा है. स्थानीय मुहर्रम कमेटी ने रेलवे की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि रेलवे को वास्तव में इस जमीन की आवश्यकता है तो उसके उपयोग को स्पष्ट किया जाए, लेकिन बिना किसी ठोस आवश्यकता के जबरन चहारदीवारी कर आम लोगों को परेशान न किया जाए. कमेटी का कहना है कि मैदान को घेरने से क्षेत्र के लोगों की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित होंगी।
प्रतिनिधिमंडल डीआरएम से मुलाकात कर अपनी आपत्ति और मांगों को लिखित रूप में सौंपेगा
बताया गया कि मंगलवार को रेलवे की टीम जेसीबी मशीन के साथ इमामबाड़ा मैदान की चहारदीवारी करने पहुंची थी, इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और विरोध शुरू कर दिया. स्थानीय लोगों के तीव्र विरोध के कारण रेलवे की टीम को बिना काम किए वापस लौटना पड़ा. स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मामले की जानकारी रेलवे के आईओडब्ल्यू विभाग को दे दी गई है. साथ ही जल्द ही क्षेत्रवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल डीआरएम से मुलाकात कर अपनी आपत्ति और मांगों को लिखित रूप में सौंपेगा।
आम जनता का जनजीवन प्रभावित
फिलहाल इमामबाड़ा मैदान की चहारदीवारी का कार्य रुका हुआ है, लेकिन इसे लेकर क्षेत्र में तनाव और चर्चा का माहौल बना हुआ है. पूर्वी कीताडीह पंचायत की उप- मुखिया मेनुल खान ने कहा कि इस मैदान में मुहर्रम के अलावा शादी- विवाह,बच्चों के खेलकूद और अन्य सामाजिक कार्यक्रम होते हैं. यदि मैदान को घेर दिया गया तो आम जनता का जनजीवन प्रभावित होगा।