Jharkhand News: राज्य में मेडिकल शिक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. शैक्षणिक सत्र 2025-26 में एमबीबीएस नामांकन प्रक्रिया को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरी नामांकन प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिए हैं और इसे रद्द कर दोबारा काउंसलिंग कराने की मांग की है.
तीन अभ्यर्थियों के जाति और निवास प्रमाण पत्र गलत
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कहा है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान नियमों को नजरअंदाज किया गया. अभ्यर्थियों की शिकायत के बाद गठित तीन सदस्यीय समिति की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. जांच रिपोर्ट के अनुसार तीन अभ्यर्थियों के जाति और निवास प्रमाण पत्र गलत पाए गए, जबकि छह अन्य अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए जो राज्य के बाहर के निवासी हैं. इसके बावजूद उन्हें मेडिकल कॉलेजों में सीटें आवंटित कर दी गईं.
जेसीईसीईबी ने जानबूझकर डाटा शेयरिंग नहीं की
उन्होंने आरोप लगाया कि जेसीईसीईबी ने जानबूझकर डाटा शेयरिंग नहीं की और एमसीसी गाइडलाइन का पालन किए बिना काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी की. एनटीए से लिंक किए बिना काउंसलिंग कराना, श्रेणी बदलकर एससी, एसटी कोटे में नामांकन करना और 1985 के बाद झारखंड निवासी नियमों का उल्लंघन करना भी गंभीर आरोपों में शामिल है.
पत्र में बाबूलाल मरांडी ने मांग की है कि पूरे नामांकन को रद्द कर फिर से पारदर्शी तरीके से काउंसलिंग कराई जाए. साथ ही इस गड़बड़ी में शामिल अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त करने और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की जरूरत बताई गई है.
योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर
मेडिकल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नामांकन प्रक्रिया पर उठे ये सवाल न केवल व्यवस्था की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाते हैं बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी असर डालते हैं. यदि जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष सही हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संगठित अनियमितता का संकेत देता है. ऐसे में सरकार के लिए यह परीक्षा की घड़ी है कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ इस प्रकरण को कैसे सुलझाती है.