Adityapur News: एनआईटी जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक होता है जब उसका उपयोग समाज और देश के कल्याण में किया जाए. उन्होंने कहा कि राज्य के समग्र विकास में तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. एनआईटी जैसे संस्थानों से अपेक्षा है कि वे केवल कुशल इंजीनियर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी तैयार करें.
उपाधि को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखें
राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि जिस ज्ञान और कौशल के बल पर उन्होंने डिग्री हासिल की है, उसे केवल व्यक्तिगत उन्नति का माध्यम न बनाएं. उन्होंने कहा कि इस ज्ञान का उपयोग समाज की समस्याओं के समाधान, उद्योगों के विकास और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया जाना चाहिए. यही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है.
तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ नैतिकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व की आधारशिला होने चाहिए. नवाचार को सामाजिक चेतना से जोड़ना समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारत तेजी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है और डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में देश अग्रणी भूमिका निभा रहा है. ऐसे में तकनीकी संस्थानों और वैज्ञानिकों की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक होगी.
एनआईटी की परंपरा को आचरण में उतारने की अपील
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे जहां भी कार्य करें, एनआईटी जमशेदपुर की गौरवशाली परंपरा को अपने आचरण में जीवित रखें. उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति जिम्मेदारियों की शुरुआत है.
जमशेदजी टाटा और रतन टाटा के मूल्यों का उल्लेख
राज्यपाल ने जमशेदजी टाटा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को रतन टाटा ने वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार, अनुसंधान, समाज के प्रति उत्तरदायित्व और अनुशासन का समन्वित स्वरूप है. एनआईटी ने देश की वैज्ञानिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
शिक्षा और अनुशासन से लक्ष्य संभव
राज्यपाल ने राष्ट्रपति के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा, परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वे कई संस्थानों के दीक्षांत समारोहों में शामिल होते हैं और अक्सर देखते हैं कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या अधिक होती है.
छात्राओं की सफलता विकसित भारत का संकेत
राज्यपाल ने कहा कि छात्राओं की बढ़ती सफलता उनकी प्रतिभा, क्षमता और आत्मविश्वास का मजबूत प्रमाण है. यह विकसित भारत की झलक भी प्रस्तुत करता है. उन्होंने इसे समाज के लिए सकारात्मक संकेत बताया. इस अवसर पर राज्य के भू राजस्व मंत्री दीपक बिरूआ ने भी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर निर्माण नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का संबोधन तकनीकी शिक्षा के सामाजिक और नैतिक पक्ष को रेखांकित करता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर निर्माण नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी है. एनआईटी जैसे संस्थानों के विद्यार्थियों से यह अपेक्षा जताई गई कि वे तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय मूल्यों को अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं.