Adityapur News: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में सोमवार को 15वां दीक्षांत समारोह शैक्षणिक गरिमा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया. भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महत्व के इस संस्थान के समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं. उनके साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, राज्य सरकार के मंत्री और कई विशिष्ट अतिथि मंच पर मौजूद रहे.
पुरस्कार और मानद उपाधियां
दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने चार प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए. इसमें दो स्वर्ण पदक और दो मानद उपाधियां शामिल रहीं. एमएससी भौतिकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कृष्णाशीष मंडल और बीटेक विद्युत अभियांत्रिकी में प्रियांशु राज को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया. समाज और संस्कृति में योगदान के लिए स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज तथा उद्योग और उद्यमिता के क्षेत्र में योगदान के लिए रविंद्र कुमार बेहरा को मानद उपाधि दी गई.
उपाधियों का वितरण
समारोह में कुल 1114 उपाधियां प्रदान की गईं जिनमें दो मानद उपाधियां शामिल थीं. 612 विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत रूप से उपाधि प्राप्त की. इनमें स्नातक स्तर के 417, स्नातकोत्तर के 149 और पीएचडी के 46 विद्यार्थी शामिल रहे. विभिन्न पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में छात्र और छात्राओं ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण प्राप्त किया.
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को दिया मार्गदर्शन
दीक्षांत संबोधन में राष्ट्रपति ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में एनआईटी जमशेदपुर का योगदान झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने संस्थान के टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर की सराहना करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थान राष्ट्र की बौद्धिक प्रयोगशालाएं होते हैं.
मानव कल्याण से तकनीक को जोड़ने का आह्वान
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से तकनीकी प्रगति को मानव कल्याण से जोड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं और तकनीकी संस्थानों की अहम भूमिका होगी. उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी के बिना अनुसंधान का महत्व सीमित रह जाता है. साइबर अपराध और ई-वेस्ट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संस्थानों को सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए.
राज्यपाल ने ज्ञान के सामाजिक उपयोग पर दिया जोर
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है और ज्ञान तभी सार्थक है जब उसका उपयोग समाज के कल्याण में हो. उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन विकसित भारत की नींव है. उन्होंने सभी स्नातकों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया.
मंत्री और प्रबंधन का संबोधन
राज्य के मंत्री दीपक बिरुआ ने समारोह में अतिथियों का स्वागत किया और विद्यार्थियों को उनकी सफलता के लिए बधाई दी. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष सुनील अलघ ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अवसरों की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं अवसर पैदा करें. उन्होंने संवाद और आत्मविश्वास को सफलता की कुंजी बताया.
संस्थान की उपलब्धियों का उल्लेख
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक गौतम सूत्रधर ने संस्थान की शैक्षणिक और शोध उपलब्धियों की जानकारी दी. उन्होंने एनआईआरएफ में 82वीं रैंक, सेंट्रल रिसर्च फैसिलिटी के सशक्तीकरण और टीबीआई के माध्यम से नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि संस्थान राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है.
एनआईटी जमशेदपुर का 15वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का आयोजन नहीं रहा बल्कि तकनीकी शिक्षा की सामाजिक जिम्मेदारी को रेखांकित करने वाला मंच बना. राष्ट्रपति और राज्यपाल के संदेशों से स्पष्ट हुआ कि आने वाले समय में तकनीकी संस्थानों की भूमिका केवल कुशल पेशेवर तैयार करने तक सीमित नहीं होगी बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए संवेदनशील और जिम्मेदार नेतृत्व गढ़ने की भी होगी.