राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के विकसित अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए अब अपराधियों की पहचान उनके चेहरे की फोटो, चलने के तरीके, लंबाई, कद-काठी और शारीरिक डील-डौल के आधार पर भी की जा सकेगी।
फिलहाल पुलिस अपराधियों की पहचान मुख्य रूप से आइरिस स्कैन और फिंगरप्रिंट के जरिए करती है, लेकिन कई मामलों में अपराधी इनसे बच निकलने में सफल हो जाते हैं। ऐसे में नई प्रणाली कारगर साबित होगी। इस सॉफ्टवेयर में देशभर के अपराधियों का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड डाला जाएगा, जिसमें बायोमेट्रिक डेटा के साथ-साथ उनके शारीरिक हाव-भाव और चलने की शैली का भी विवरण होगा।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सीसीटीवी कैमरों में कैद फुटेज के आधार पर संदिग्ध व्यक्ति के डेटा का मिलान तुरंत किया जा सकेगा। कोई अपराधी चेहरे को ढंक भी ले तब भी उसकी चाल, शरीर की बनावट और अन्य शारीरिक संकेतों के आधार पर पहचान संभव हो सकेगी। इससे हत्या, लूट, चोरी, आतंकवाद और संगठित अपराध जैसे मामलों की जांच में तेजी आएगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में इस नई प्रणाली ओसीएनडी को लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य देशभर की पुलिस और जांच एजेंसियों को एक साझा, सटीक और तेज पहचान प्रणाली उपलब्ध कराना है। यह सिस्टम राज्य पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और फॉरेंसिक इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित करेगा।
पहले आइरिस स्कैन और फिंगरप्रिंट की मदद से अपराधियों की पहचान की जाती थी पर जल्द ही इस तकनीक को अपग्रेड कर अन्य डेटा भी सुरक्षित रखे जाएंगे। इससे न केवल शहर के अपराधी बल्कि देश भर के अपराधियों का डेटा मौजूद रहेगा।
- कुमार शिवाशीष, सिटी एसपी