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  • 2026-01-03

Jharkhand News: CM हेमंत सोरेन ने सावित्रीबाई फुले और जयपाल सिंह मुंडा को जयंती पर किया नमन, “आदिवासी समाज की गरिमा और अधिकारों के सबसे सशक्त प्रतिनिधि”

Jharkhand News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दूरदर्शी आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर उन्हें नमन किया. उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासी अस्मिता, अधिकार और स्वशासन की आवाज को देश के सर्वोच्च मंच तक पहुंचाया. वे सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं थे बल्कि संविधान सभा में आदिवासी समाज की गरिमा और अधिकारों के सबसे सशक्त प्रतिनिधि रहे.

जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का अधिकार सुनिश्चित करना
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज को पिछड़ा समझने की सोच के विरुद्ध जयपाल सिंह मुंडा ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि आदिवासी इस देश के पहले नागरिक हैं. जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का अधिकार सुनिश्चित करना उनके विचार और संघर्ष का केंद्र रहा. उनका पूरा जीवन न्याय आत्मसम्मान और आदिवासी स्वशासन के लिए प्रेरणा देता है.

सावित्रीबाई फुले एक साहसी समाज सुधारक थीं
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी को ओलंपिक में स्वर्णिम पहचान दिलाने वाले पूर्व कप्तान संविधान सभा के सदस्य और प्रखर राजनीतिक चिंतक जयपाल सिंह मुंडा को सादर नमन. इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर भी उन्हें याद किया. उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले एक साहसी समाज सुधारक थीं जिन्होंने शिक्षा को सामाजिक समानता का सबसे मजबूत आधार बनाया. उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण जीवन से समानता और न्याय का वास्तविक अर्थ समाज को समझाया.

महिलाओं और वंचित वर्गों को जानबूझकर पीछे रखा जाता था
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दौर में महिलाओं और वंचित वर्गों को जानबूझकर पीछे रखा जाता था उस समय सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के माध्यम से आत्मसम्मान और अधिकारों की चेतना जगाई. शोषितों के साथ खड़ा होना उनका संकल्प था और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष ही उनकी पहचान रही. उनका जीवन आज भी न्याय संवेदना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश देता है.

दोनों ही अपने अपने दौर में वंचित समाज की आवाज बने
जयपाल सिंह मुंडा और सावित्रीबाई फुले दोनों ही अपने अपने दौर में वंचित समाज की आवाज बने. एक ने आदिवासी स्वशासन और अधिकारों को राष्ट्रीय विमर्श में स्थापित किया तो दूसरी ने शिक्षा के जरिए सामाजिक समानता की नींव रखी. इन दोनों व्यक्तित्वों को एक साथ याद करना यह दर्शाता है कि झारखंड की राजनीति सामाजिक न्याय और ऐतिहासिक चेतना को केंद्र में रखकर अपनी वैचारिक दिशा तय करने की कोशिश कर रही है.
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