Chaibasa News: चाईबासा के झींकपानी स्थित एसीसी सीमेंट प्लांट, जिसे अब अडानी एसीसी के नाम से जाना जाता है, के बंद होने की खबर से पूरे इलाके में मायूसी छा गई है। हालांकि कंपनी की ओर से अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार 5 मई 2026 से प्लांट पूरी तरह बंद है और मशीनों व उपकरणों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा चुका है। 1946 में स्थापित यह प्लांट कभी कोल्हान की औद्योगिक पहचान माना जाता था।
कभी 30 हजार लोगों की रोजी-रोटी था सहारा, अब सन्नाटे में डूबा इलाका
एक समय ऐसा था जब एसीसी प्लांट में 2000 से अधिक लोग सीधे तौर पर कार्यरत थे, जबकि 25 से 30 हजार लोग परोक्ष रूप से इससे जुड़े हुए थे। लेकिन झारखंड गठन के बाद हालात धीरे-धीरे बिगड़ने लगे। कंपनी ने कर्मचारियों को वीआरएस देना शुरू किया और कामगारों की संख्या लगातार घटती गई। हाल के वर्षों में यहां केवल करीब 100 स्थायी और 800 ठेका मजदूर ही काम कर रहे थे। आज झींकपानी की सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और कंपनी कॉलोनी के घर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।
384 करोड़ की मदद भी नहीं बचा सकी कंपनी, अवैध माइनिंग विवाद बना बड़ा कारण
साल 2003 में राज्य सरकार ने कंपनी को दोबारा पटरी पर लाने के लिए करीब 384 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी थी, लेकिन इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे। दूसरी ओर कंपनी पर करीब 900 करोड़ रुपये की अवैध माइनिंग का आरोप भी लगा। 2003 से 2020-21 तक लीज प्रक्रिया और खनन विवादों के कारण प्लांट और खदान दोनों प्रभावित होते रहे। बाद में अडानी ग्रुप ने इसे टेकओवर किया, लेकिन उत्पादन और संचालन सामान्य नहीं हो सका।
ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच बढ़ती दूरी ने गहराया संकट
पिछले दो-तीन वर्षों में ग्रामीणों, रैयतों, प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी उनका विश्वास जीतने में विफल रही। लगातार बढ़ते विवाद और असंतोष के बीच आखिरकार कंपनी को बंदी की स्थिति तक पहुंचना पड़ा। लोगों का कहना है कि चाईबासा की राजनीति और प्रशासनिक उदासीनता ने कभी गुलजार रहे झींकपानी को वीरान बना दिया।
अब “एसीसी बचाओ” की लड़ाई, 31 मई को होगी निर्णायक बैठक
कंपनी बंद होने की खबर के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 29 मई को प्रस्तावित पदयात्रा को परिवहन मंत्री Deepak Birua की पहल पर स्थगित कर दिया गया है। अब 31 मई को झींकपानी में मंत्री, सांसद, विधायक, कंपनी प्रतिनिधि और ग्रामीणों की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें प्लांट को बंद होने से बचाने पर चर्चा की जाएगी। इसके लिए “एसीसी बचाओ संघर्ष समिति” का गठन भी किया गया है। जिला परिषद सदस्य और मजदूर नेता John Miran Munda ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए कृषि, उद्योग और व्यापार तीनों जरूरी हैं, और इस स्थिति के लिए कंपनी प्रबंधन व सरकार दोनों जिम्मेदार हैं।