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  • 2026-05-12

Gumla News : गुमला DC की सरकार को रिपोर्ट, ट्रेजरी घोटाले के आरोप गलत बताए

Gumla News : गुमला ट्रेजरी से वेतन मद में फर्जी निकासी के आरोपों को गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने खारिज कर दिया है। मामले की जांच के बाद उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिले में किसी तरह की अवैध निकासी नहीं हुई है। हालांकि जांच में एक शिक्षक को गलती से दो जिलों से एक महीने का वेतन भुगतान होने की पुष्टि हुई, जिसे बाद में वापस जमा करा दिया गया।


महालेखाकार की प्रारंभिक जांच के बाद वित्त विभाग ने मांगी थी रिपोर्ट


सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि महालेखाकार (ऑडिट) ने प्रारंभिक जांच के दौरान गुमला ट्रेजरी से वेतन मद में फर्जी निकासी की आशंका जताई थी। इसके बाद वित्त विभाग ने गुमला उपायुक्त को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।

उपायुक्त की ओर से कराई गई जांच में गुमला एसपी और जिला शिक्षा अधीक्षक से भी रिपोर्ट मांगी गई। जांच के दौरान पुलिस विभाग और शिक्षा विभाग के वेतन भुगतान रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा की गई।


पुलिस विभाग की जांच में अवैध निकासी नहीं मिलने की पुष्टि


गुमला एसपी ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग के वेतन मद में किसी भी प्रकार की अवैध निकासी नहीं हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2018 से अगस्त 2022 तक DDO Code GML/POL/004 के जरिए किसी भी राशि का भुगतान संबंधित बैंक खाते में नहीं किया गया।

इस रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त ने सरकार को बताया कि ट्रेजरी से फर्जी भुगतान की आशंका सही नहीं पाई गई और विभागीय रिकॉर्ड सामान्य पाए गए।


शिक्षक को दो जिलों से वेतन मिलने की गलती, राशि वापस जमा


जिला शिक्षा अधीक्षक की जांच में धनेश्वर यादव नामक शिक्षक के मामले का उल्लेख किया गया। जांच में पाया गया कि उनका तबादला सिमडेगा से गुमला जिले में हुआ था और अंतिम वेतन प्रमाण पत्र सितंबर 2025 में गुमला पहुंचा था।

इसी दौरान दुर्गा पूजा से पहले वेतन भुगतान के सरकारी निर्देश के कारण तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटि से सितंबर 2025 का वेतन सिमडेगा और गुमला दोनों जिलों से जारी हो गया। मामला सामने आने के बाद धनेश्वर यादव की पत्नी ने अतिरिक्त मिले 79,040 रुपये चालान के जरिए वापस सरकारी खाते में जमा कर दिए।

जांच में एक ही बैंक खाते में दो Payee ID से वेतन भुगतान के मामले की भी समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि संबंधित खाता पति-पत्नी का संयुक्त बैंक खाता था और दोनों शिक्षक होने के कारण उसी खाते में अलग-अलग Payee ID से वेतन जमा हुआ था।

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