Jamshedpur News : शहरी स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जमशेदपुर अक्षेस (JNAC) और टाटा स्टील UISL द्वारा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 2026 पर एक रणनीतिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। कार्यशाला का नेतृत्व जेएनएसी के उपनगर आयुक्त कृष्ण कुमार ने किया, जिसमें खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल संचालकों को नियमों के अनुपालन के बारे में जानकारी दी गई।
1 अप्रैल 2026 से लागू SWM नियम, बड़े संस्थानों के लिए सख्त अनुपालन अनिवार्य
नए नियामक ढांचे के तहत 20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले, प्रतिदिन 5,000 लीटर से अधिक जल उपयोग करने वाले या 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (BWG) की श्रेणी में रखा गया है।
खाद्य कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने और वैज्ञानिक निपटान पर जोर
इन संस्थानों के लिए अब कचरे का 100 प्रतिशत स्रोत पर ही पृथक्करण अनिवार्य कर दिया गया है। कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और घरेलू खतरनाक, इन चार श्रेणियों में बांटना होगा। नए नियमों के अनुसार गीले कचरे का निपटान संस्थान परिसर में ही बायो-मिथेनाइजेशन प्लांट या ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर (OWC) के माध्यम से करना अनिवार्य होगा। साथ ही, कचरे की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए सभी जनरेटरों को ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा।
कार्यशाला में वैज्ञानिक तरीके से कचरा निपटान की आवश्यकता पर बल दिया गया और खुले में कचरा फेंकने पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए गए। व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दिन में दो बार कचरा संग्रहण प्रणाली पर भी चर्चा हुई।
इसके अलावा, खाद्य कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोकने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसमें खाद्य कचरे को सुअरों को खिलाने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि जैविक कचरे का निपटान स्वच्छ और मानक प्रक्रियाओं के तहत किया जा सके।
यह पहल जमशेदपुर को स्वच्छ और सतत शहर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।