Jharkhand News: झारखंड में इस वर्ष राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू द्वारा इंडिया गठबंधन की ओर से एक सीट पर दावा किए जाने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों खेमों में रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो गया है. बजट सत्र के बाद इस चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने की संभावना है.
राज्यसभा की जिन दो सीटों पर चुनाव होना है, उनमें एक सीट दिशोम गुरु शिबू सोरेन के 4 अगस्त को निधन के बाद से रिक्त है, जबकि दूसरी सीट भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है. इन दोनों सीटों पर सत्ताधारी गठबंधन (झामुमो-कांग्रेस) और विपक्षी दल भाजपा की नजरें टिकी हुई हैं.
एक सीट पर झामुमो की स्थिति मजबूत
विधानसभा के मौजूदा अंकगणित के अनुसार, दो में से एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा की जीत लगभग तय मानी जा रही है. राज्यसभा चुनाव में किसी भी प्रत्याशी को प्रथम वरीयता से जीत के लिए कम से कम 27 मतों की आवश्यकता होती है. झामुमो के पास विधानसभा में सबसे अधिक 34 विधायक हैं, जिससे उसकी स्थिति बेहद मजबूत है.
दूसरी सीट पर कड़ा मुकाबला
दूसरी सीट पर मुकाबला कांटे का माना जा रहा है, जहां विभिन्न दलों के बीच जोड़-तोड़ की राजनीति देखने को मिल सकती है. विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या इस प्रकार है:
- झामुमो: 34
- भाजपा: 21
- कांग्रेस: 16
- राजद: 4
- भाकपा-माले: 2
- आजसू: 1
- जदयू: 1
- लोजपा (आर): 1
इसी संतुलन को देखते हुए कांग्रेस ने दूसरी सीट पर अपना दावा पेश कर दिया है, जिससे सियासी तापमान और बढ़ गया है.
गठबंधन बनाम विपक्ष की रणनीति
जहां सत्ताधारी दल एकजुट होकर दोनों सीटों पर बढ़त बनाने की कोशिश में हैं, वहीं भाजपा भी विपक्षी खेमे को साधकर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है. यह चुनाव न केवल राज्यसभा की सीटों के लिए, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है.
झारखंड की ये दो राज्यसभा सीटें केवल उच्च सदन का प्रतिनिधित्व तय नहीं करेंगी, बल्कि यह भी संकेत देंगी कि राज्य की राजनीति में सत्ता संतुलन किस दिशा में जा रहा है. एक ओर झामुमो की संख्यात्मक मजबूती उसे आत्मविश्वास दे रही है, तो दूसरी ओर दूसरी सीट पर कांग्रेस का दावा गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है. यह मुकाबला आने वाले समय में राज्य की सियासी दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है.