Jharkhand News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) अपनी कार्यप्रणाली और नियमों के अनुपालन को लेकर एक बार फिर सवालों के घेरे में है. आयोग पर आरोप है कि वह परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए खुद द्वारा बनाए गए नियमों का उल्लंघन कर रहा है. ताजा मामला सफल और असफल उम्मीदवारों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं (कॉपियां) दिखाने से जुड़ा है, जिसमें जेपीएससी ने अपने ही नियमों और प्रथम अपीलीय पदाधिकारी के आदेश के बावजूद आवेदक को जानकारी देने से मना कर दिया है.
पारदर्शिता के लिए बने थे विशेष नियम
जेपीएससी ने “रूल्स ऑफ प्रोसीजर 2002” के अध्याय-III के नियम 4(xiii) के तहत यह प्रावधान किया था कि परिणाम जारी होने के बाद सभी परीक्षार्थी अपने अंकों का विवरण और उत्तर पुस्तिका देख सकते हैं. इस नियम को 15 जनवरी 2015 को एक कार्यालय आदेश के जरिए प्रभावी किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करना था. नियम के मुताबिक, रिजल्ट आने के 60 दिनों के भीतर इसके लिए आवेदन किया जा सकता है.
अपीलीय आदेश के बाद भी जानकारी देने में आनाकानी
इस मामले में राज्य सरकार के प्रशाखा पदाधिकारी राजीव कुमार ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 की अपनी कॉपियां देखने के लिए आवेदन किया था. जब उन्हें समय पर सूचना नहीं मिली, तो उन्होंने प्रथम अपीलीय पदाधिकारी का दरवाजा खटखटाया. अपीलीय पदाधिकारी ने 17 अक्टूबर 2025 को स्पष्ट आदेश दिया कि मांगी गई जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराई जाए. इस आदेश के बाद जन सूचना पदाधिकारी ने परीक्षा नियंत्रक से फाइल की मांग भी की, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उम्मीदवार को कॉपियां नहीं दिखाई गईं.
नियमों की अवहेलना और लंबित आवेदन
आयोग के पास वर्तमान में कॉपियां देखने के लिए सैकड़ों आवेदन लंबित हैं. नियमानुसार, परीक्षा परिणाम के बाद मार्कशीट की हार्ड कॉपी पर परीक्षा नियंत्रक, प्रोग्रामर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं और इसकी एक प्रति जन सूचना पदाधिकारी के पास होनी चाहिए. इसके बावजूद जेपीएससी द्वारा सूचना देने में की जा रही देरी ने आयोग की विश्वसनीयता और परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.