Jharkhand News: ग्रामीण विकास विभाग ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रिक्त पदों को भरने की कवायद तेज कर दी है. विभाग ने राज्य के सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए कर्मियों की कमी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए. इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की तकनीकी स्वीकृति और क्रियान्वयन में होने वाले विलंब को समाप्त करना है.
क्षेत्रीय और तकनीकी पदों पर होगी नियुक्ति
विभाग ने विशेष रूप से बेयर फुट टेक्नीशियन (बीएफटी) और विभिन्न प्रखंडों में रिक्त क्षेत्रीय कर्मियों के पदों पर त्वरित बहाली करने को कहा है. कई जिलों से यह रिपोर्ट मिली थी कि तकनीकी कर्मचारियों के अभाव में योजनाओं की प्रगति धीमी पड़ गई है. नई नियुक्तियों से न केवल काम में तेजी आएगी, बल्कि तकनीकी स्तर पर योजनाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है.
बिरसा हरित ग्राम योजना के लिए नियुक्त होंगे विशेषज्ञ
मनरेगा के तहत संचालित “बिरसा हरित ग्राम योजना” की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर एक विशेषज्ञ की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. इसके लिए कृषि, बागवानी या वानिकी (एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर या फॉरेस्ट्री) में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री धारक युवाओं को मौका मिलेगा. यह विशेषज्ञ मुख्य रूप से पौधरोपण की गुणवत्ता की निगरानी करेंगे और विभाग को तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे.
रोजगार सृजन में मिलेगी मजबूती
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि रिक्त पदों के भरने से प्रशासनिक और तकनीकी बाधाएं दूर होंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की प्रक्रिया को गति मिलेगी. शासन ने सभी आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंच सके.
मनरेगा जैसी श्रम-प्रधान योजना में तकनीकी और क्षेत्रीय कर्मियों की कमी सीधे तौर पर भुगतान और योजना की स्वीकृति को प्रभावित करती है. सरकार का यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक प्रशासनिक सुधार है. विशेष रूप से बागवानी विशेषज्ञों को जोड़ना यह दर्शाता है कि सरकार अब केवल गड्ढे खोदने तक सीमित न रहकर, बिरसा हरित ग्राम जैसी दीर्घकालिक योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है.