Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को विस्थापन, भूमि अधिग्रहण और पेयजल योजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई. सदन में जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जिसमें रैयतों की जमीन बचाने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया.
रैयतों की जमीन और विस्थापन का संकट
विधायक जयराम महतो ने नई परियोजनाओं के लिए रैयतों की जमीन अधिग्रहण का मामला प्रमुखता से उठाया. उन्होंने बताया कि गोंदुलपाड़ा में जमीन बचाने के लिए ग्रामीण पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. उन्होंने मांग की कि राज्य में अब तक जितनी भी परियोजनाओं के लिए जमीन ली गई है, उन सभी की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके.
बाबूलाल मरांडी ने उठाई जमीन के बदले जमीन की मांग
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने विस्थापन के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जब खेतीहर लोगों के पास जमीन नहीं बचती, तो उनके पास पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता. उन्होंने संताल परगना की पैनम कोल माइंस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोगों को केवल छोटे घर देकर छोड़ दिया गया. मरांडी ने जोर दिया कि सरकार को जमीन के बदले जमीन उपलब्ध कराने की ठोस नीति अपनानी चाहिए.
डोमचांच जलापूर्ति योजना पर तकनीकी विवाद
पेयजल संकट को लेकर विधायक अमित यादव ने डोमचांच शहरी जलापूर्ति योजना के लिए तिलैया डैम से पानी लेने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने तर्क दिया कि बराकर नदी में जलस्तर कम होने से भविष्य में समस्या हो सकती है. इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने जवाब दिया कि तिलैया डैम से पानी लाने पर लागत 20 से 25 करोड़ रुपये तक बढ़ जाएगी, जबकि बराकर नदी से 10 लाख लीटर पानी उपलब्ध कराया जा सकता है.
नए छात्रावास और सिंचाई परियोजनाओं पर आश्वासन
सदन की कार्यवाही के दौरान मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि छात्रों की सुविधा के लिए नए छात्रावास और बालिका छात्रावासों का निर्माण कराया जाएगा. वहीं, टुंडी और पीरटांड़ में चल रही मेगा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं पर मंत्री हफीजुल अंसारी ने स्पष्ट किया कि 200 एमसीएम तक पानी लेने के लिए एनओसी की बाधा नहीं आएगी, जिससे इन परियोजनाओं के कार्य में तेजी आएगी.