Pakur ITDA Scam: पाकुड़ में सरकारी खजाने में हुई 12.38 करोड़ की भारी-भरकम सेंधमारी अब सिस्टम की सुस्ती की भेंट चढ़ती दिख रही है. दिसंबर 2025 में जब इस घोटाले की परतें खुली थीं, तो लगा था कि दोषियों का बचना नामुमकिन है. लेकिन आज चार महीने बीत जाने के बाद भी हकीकत यह है कि केस के मुख्य किरदार पुलिस की पहुंच से कोसों दूर हैं. ऐसा लग रहा है जैसे करोड़ों के वारे-न्यारे करने वाले जालसाजों के आगे जांच एजेंसियां बेबस खड़ी हैं.
सीआईडी की एंट्री के बाद भी नतीजा जीरो
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच का जिम्मा राज्य की बड़ी एजेंसी सीआईडी (CID) को सौंपा गया था. नगर थाना में कुल 27 लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें दफ्तर के कर्मचारी भी शामिल थे. उम्मीद थी कि सीआईडी इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश करेगी, लेकिन 120 दिन का वक्त गुजर जाने के बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात जैसा ही है. हैरानी की बात यह है कि सबूत हाथ में होने के बावजूद मुख्य आरोपित की गर्दन तक कानून के हाथ नहीं पहुंच पाए हैं.
रसूख के आगे सिस्टम हुआ सुस्त?
शहर की गलियों में अब यह चर्चा आम हो गई है कि क्या यह जांच केवल दिखावे के लिए है? लोगों का मानना है कि छोटी मछलियों पर तो कार्रवाई हो रही है, लेकिन इस महालूट का "बड़ा मगरमच्छ" सरेआम घूमकर कानून को ठेंगा दिखा रहा है. प्रशासन की इस रहस्यमयी खामोशी ने अब जनता के मन में सवाल पैदा कर दिए हैं. चार महीने की यह खामोशी इशारा कर रही है कि शायद इस बड़े घोटाले को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी चल रही है.
आईटीडीए घोटाले ने हिला दी थी सरकार की नींव
यह पूरा मामला आईटीडीए (ITDA) कार्यालय से फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये निकालने से जुड़ा है. विभाग के डायरेक्टर ने खुद 27 लोगों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी. सरकारी पैसे की इतनी बड़ी लूट के बावजूद गिरफ्तारी में हो रही देरी न केवल न्याय की उम्मीद तोड़ रही है, बल्कि भ्रष्ट लोगों के मनोबल को भी बढ़ा रही है. अब सवाल यह है कि क्या पाकुड़ का यह महाघोटाला कभी सुलझेगा या फिर फाइलों में धूल फांकता रह जाएगा?