Punjab Politics: दिल्ली के बाद अब पंजाब में भी आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई और पार्टी के नेता ज्ञान सिंह मान ने “आप” का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है. पंजाब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. मुख्यमंत्री के करीबी परिवार के सदस्य का इस तरह पार्टी छोड़ना भगवंत मान के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका माना जा रहा है.
कांग्रेस का तीखा तंज: "7 सांसद और 1 चाचे दा मुंडा"
आम आदमी पार्टी में मची इस भगदड़ पर विपक्षी दल कांग्रेस ने चुटकी लेने में देरी नहीं की. पंजाब कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” पर पोस्ट करते हुए लिखा, "AAP डाउन- 7 सांसद और 1 चाचे दा मुंडा (चचेरा भाई) गए." दरअसल, पिछले महीने ही आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद पाला बदलकर बीजेपी में शामिल हो गए थे, जिनमें से छह पंजाब से ही प्रतिनिधित्व कर रहे थे.
पंजाब में बीजेपी का बढ़ता कुनबा
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है. सुनील जाखड़ ने ज्ञान सिंह मान का स्वागत करते हुए कहा कि "पार्टी की विकासोन्मुख नीतियों के कारण लोग बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं." उन्होंने आगे कहा कि जब मुख्यमंत्री के अपने घर में ही पार्टी पर भरोसा टूट रहा है, तो यह स्पष्ट है कि पंजाब की जनता अब "झूठे वादों" की राजनीति से थक चुकी है.
“आप” के भीतर बढ़ती बगावत और संकट
पंजाब की सत्ताधारी पार्टी में आंतरिक कलह अब सड़कों पर नजर आने लगी है. राघव चड्ढा की कथित बगावत के बाद राज्यसभा में पार्टी पहले ही कमजोर हो चुकी है, और अब मुख्यमंत्री के परिवार में लगी इस सेंध ने पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो आगामी चुनावों में “आप” के लिए अपनी सत्ता बचाए रखना एक कठिन चुनौती बन सकता है.