Ranchi News: झारखंड में कथित भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में सामने आए विभिन्न मामलों में सत्ता से जुड़े लोगों के नाम या संबंध सामने आने के कारण राज्य की जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है। मरांडी ने इन मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।
साहिबगंज से नियुक्ति तक कई मामलों का किया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने साहिबगंज में कथित 1200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि के आरोपी होने की बात सामने आई है। उन्होंने शराब से जुड़े कथित घोटाले का भी जिक्र किया और मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव विनय चौबे की भूमिका को लेकर सवाल उठाए।
JSSC-CGL नियुक्ति मामले को लेकर भी मरांडी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी के नाम पर कथित लेन-देन के मामले में मुख्यमंत्री के करीबी लोगों और मुख्यमंत्री आवास से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका सामने आई है। इसके अलावा उन्होंने जमीन और खनन लीज से जुड़े मामलों में भी मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए।
बालू, कोयला और खनन से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग तक सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार के आरोप केवल एक-दो मामलों तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार बालू, पत्थर, कोयला और लौह अयस्क से जुड़े कारोबार के साथ-साथ ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी नियुक्तियों में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं।
मरांडी ने कहा कि इन मामलों की जांच की जिम्मेदारी राज्य की एजेंसियों के पास होने के बावजूद उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मामलों में जांच की दिशा सत्ता के शीर्ष स्तर तक पहुंचने की बात कही जा रही है, वहां राज्य की एजेंसियों से स्वतंत्र जांच की उम्मीद करना उचित नहीं होगा।
ACB और CID की जांच पर भी उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और CID की कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने शराब से जुड़े मामले में ACB की जांच तथा नियुक्ति से संबंधित मामले में CID की पड़ताल का उल्लेख करते हुए कहा कि इन जांचों की निष्पक्षता को लेकर पहले से ही सवाल मौजूद हैं।
केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग
मरांडी ने कहा कि जिन मामलों में राज्य सरकार या उसके करीबी लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी जांच राज्य की एजेंसियों के बजाय किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से होनी चाहिए। उन्होंने CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि इससे जांच की निष्पक्षता को लेकर लोगों के बीच भरोसा मजबूत हो सकता है। हालांकि, मरांडी की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के स्तर पर नहीं हुई है।