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  • 2026-01-06

Jharkhand News: पैनम कोल माइंस में अवैध खनन मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई, जवाब के लिए पैनम को मिला समय

Jharkhand News: पैनम कोल माइंस में कथित अवैध खनन और विस्थापितों के पुनर्वास से जुड़ा मामला एक बार फिर झारखंड हाईकोर्ट के समक्ष आया, जहां इस विषय पर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. याचिका में सीबीआई जांच की मांग के साथ-साथ खनन से प्रभावित लोगों के पुनर्वास का मुद्दा उठाया गया है.

पैनम कंपनी द्वारा गंभीर स्तर पर गड़बड़ी
सुनवाई के दौरान पंजाब पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन की ओर से कोर्ट में जवाब दाखिल किया गया. निगम की तरफ से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पूरे प्रकरण में पैनम कंपनी द्वारा गंभीर स्तर पर गड़बड़ी की गई है. इसके बाद पैनम कोल माइंस की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने आरोपों पर विस्तृत जवाब देने के लिए समय मांगा. अदालत ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तिथि तय कर दी. इससे पहले कोर्ट अपने आदेश में पंजाब पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन से यह स्पष्ट करने को कह चुका है कि उसकी कुल संपत्तियां कितनी हैं और उन संपत्तियों को सीज कर बेचने की कार्रवाई क्यों न की जाए. मौजूदा सुनवाई में हाईकोर्ट ने अपने इस पूर्व आदेश में किसी तरह का संशोधन नहीं किया. जनहित याचिका पर सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में हुई.

पैनम कोल ने निर्धारित लीज क्षेत्र और सीमा से अधिक खनन किया
पूरा विवाद पैनम माइंस कंपनी से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2015 में पाकुड़ और दुमका जिले में कोयला खनन के लिए लीज दी गई थी. इस परियोजना में पंजाब पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन भी भागीदार रही है. आरोप है कि पैनम कोल ने निर्धारित लीज क्षेत्र और सीमा से अधिक खनन किया, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता राम सुभग सिंह ने जनहित याचिका दाखिल की है.

सरकारी राजस्व की क्षति और स्थानीय लोगों के विस्थापन जैसे गंभीर सवाल
पैनम कोल माइंस से जुड़ा यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी राजस्व की क्षति और स्थानीय लोगों के विस्थापन जैसे गंभीर सवाल भी जुड़े हुए हैं. हाईकोर्ट का सख्त रुख और संपत्ति सीज करने तक की टिप्पणी यह संकेत देती है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से देख रही है. अगली सुनवाई में पैनम कंपनी की ओर से दिया जाने वाला जवाब यह तय करेगा कि जांच की दिशा और तेज होती है या नहीं, और क्या इस प्रकरण में केंद्रीय एजेंसी की भूमिका आगे बढ़ेगी.
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