MCD Bulldozer Action: पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास बुधवार को हालात तनावपूर्ण रहे, हालांकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है. मंगलवार आधी रात को हुई बुलडोजर कार्रवाई और इसके बाद हुए पथराव के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.
अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
पुलिस ने मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है. प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था से निपटने के लिए पूरी तैयारी है. बुधवार सुबह से ही फैज ए इलाही मस्जिद के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है.
फिलहाल इलाके में शांति बनी हुई है
सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा के अनुसार हालात को तुरंत काबू में कर लिया गया था और फिलहाल इलाके में शांति बनी हुई है. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र को नौ अलग अलग जोन में बांटा गया है. हर जोन की निगरानी डीएसपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं.
पुलिस टीम पर हुए पथराव की घटना को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. दिल्ली पुलिस के पास इस मामले से जुड़े सौ से अधिक वीडियो फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग मौजूद हैं. इन्हीं फुटेज के आधार पर पत्थरबाजों और उपद्रवियों की पहचान की जा रही है. इस हिंसा में छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिन्हें तत्काल इलाज मुहैया कराया गया.
बुलडोजर कार्रवाई के बाद इलाके में मलबे का लगा अंबार
रातभर चली बुलडोजर कार्रवाई के बाद इलाके में मलबे का अंबार लगा हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक तीस से ज्यादा बुलडोजरों की मदद से कार्रवाई की गई, जिसके बाद अब तक दो सौ से अधिक ट्रक मलबा हटाया जा चुका है. सफाई कार्य में कम से कम चार दिन का समय लगने की संभावना जताई गई है.
36 हजार वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त
नगर निगम के अनुसार करीब 36 हजार वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है. इसमें बारात घर, डिस्पेंसरी और कई दुकानें शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि अभी भी करीब 20 प्रतिशत अतिक्रमण बचा हुआ है, जिसे जल्द हटाया जाएगा. फिलहाल पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई है.
यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के 12 नवंबर 2025 के आदेश के तहत की गई है. कोर्ट ने रामलीला मैदान के आसपास अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया था. मस्जिद कमेटी का दावा है कि संबंधित संपत्ति वक्फ बोर्ड की अधिसूचित जमीन है और वे इसका किराया अदा कर रहे हैं. कमेटी ने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी थी और उस पर नोटिस भी जारी हुआ था, इसके बावजूद डिमोलिशन ड्राइव को आगे बढ़ाया गया.
स्थानीय असंतोष के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती
तुर्कमान गेट की घटना दिखाती है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कितनी संवेदनशील हो सकती है. प्रशासन की सख्ती और भारी पुलिस बल की तैनाती से हालात फिलहाल काबू में हैं, लेकिन कानूनी दावों और स्थानीय असंतोष के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बना हुआ है. आने वाले दिनों में जांच और अदालती प्रक्रिया यह तय करेगी कि इस कार्रवाई के बाद स्थिति किस दिशा में जाती है.