डिप्लोमा इन फार्मेसी कोर्स संचालित कर रहे 36 संस्थान ऐसे भी मिले हैं, जहां टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ की आंशिक कमी है, लेकिन इनका अपना भवन व अपनी जमीन है। ये संस्थान संचालन के लिए प्रयासरत तो हैं, लेकिन इन संस्थानों ने भी डिप्लोमा इन फार्मेसी के लिए न तो एनओसी लिया है और न ही इसके लिए आवेदन ही किया है। इन सभी 36 फार्मेसी संस्थानों से स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्टीकरण पूछा है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच के क्रम में यह भी सवाल उठा है कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया पीसीआई) द्वारा तय प्रावधान के अनुसार फार्मेसी संस्थानों में शिक्षकों, भवन और अन्य संसाधनों की जांच परीक्षा समिति द्वारा क्यों नहीं की गई। इस मामले में डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जामिनेशन कमेटी के अध्यक्ष/सदस्य सचिव से भी स्पष्टीकरण पूछा जाएगा।
विभागीय कमेटी की जांच में हुआ खुलासा: राज्यभर में संचालित डिप्लोमा इन फार्मेसी पाठ्यक्रम में गंभीर अनियमितताओं की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने फार्मेसी संस्थानों की जांच के लिए बीते साल अगस्त में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। विभागीय उप सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता में गठित कमेटी में अवर सचिव धीरंजन प्रसाद शर्मा व फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय शामिल थे। जांच समिति ने राज्य के कुल 71 फार्मेसी संस्थानों की जांच की तो व्यापक अनियमितता सामने आई।