Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-01-08

Jharkhand News: रिव्यू याचिका खारिज, बोकारो के भू-अर्जन पदाधिकारी पर 1 लाख का व्यक्तिगत जुर्माना

Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर रिव्यू याचिका को खारिज करते हुए बोकारो के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी पर एक लाख रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है. जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने साफ कहा कि यह याचिका गंभीर कानूनी आधार पर नहीं बल्कि अदालती कार्यवाही से बचने के इरादे से दाखिल की गई थी.

455 दिन की देरी पर अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने 455 दिनों की देरी के बाद यह रिव्यू याचिका तब दायर की, जब जमीन मालिकों ने पुराने आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी. कोर्ट ने माना कि इतनी देरी खुद इस बात का संकेत है कि याचिका का उद्देश्य सिर्फ अवमानना से बचना था.

जुर्माना जेब से देने का आदेश
हाईकोर्ट ने बोकारो के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर अपनी निजी राशि से एक लाख रुपये जमीन मालिक लखी बाउरी को भुगतान करें. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भुगतान किसी सरकारी खाते से नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर किया जाएगा.

राधानगर की जमीन से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला बोकारो जिले के मौजा राधानगर की करीब दो एकड़ जमीन से जुड़ा है. यह जमीन वर्ष 1988-89 में सरकार की एक योजना के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थी लखी बाउरी को आवंटित की गई थी. बाद में इसी जमीन को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को रेलवे साइडिंग और डिपो निर्माण के लिए हस्तांतरित कर दिया गया.

मुआवजे को लेकर सरकार की दलील खारिज
राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि जमीन गैर-मजरुआ थी और बीपीसीएल की ओर से जमा की गई 91.13 लाख रुपये की राशि मुआवजा नहीं बल्कि सलामी और लगान के रूप में थी. हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि जब बीपीसीएल मुआवजे के बराबर राशि राज्य सरकार के पास जमा कर चुका है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह यह रकम सही जमीन मालिक को दे.

निर्धारित समय पर भुगतान नहीं तो रिपोर्ट
अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि जिला भू अर्जन पदाधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर व्यक्तिगत जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं करते हैं, तो इस मामले को संबंधित खंडपीठ के समक्ष रिपोर्ट किया जाएगा.

हाईकोर्ट का यह आदेश सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही को रेखांकित करता है. लंबे समय तक आदेश का पालन नहीं करना और फिर अवमानना से बचने के लिए याचिका दायर करना अदालत की नजर में गंभीर लापरवाही माना गया है. व्यक्तिगत जुर्माने का निर्देश यह संदेश देता है कि सरकारी पद पर बैठे अधिकारियों को भी न्यायिक आदेशों की अनदेखी की कीमत चुकानी पड़ सकती है.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !