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  • 2026-01-08

I-PAC ED Raid: चुनाव आते ही गैर-भाजपा शासित राज्यों में सक्रिय होती ED-CBI, फिर उठा एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल का सवाल

I-PAC ED Raid (Rishabh Rahul): चुनाव का मौसम आते ही एक सवाल फिर हवा में तैरने लगता है. क्या ED और CBI सच में कानून के मुताबिक काम करती हैं या फिर ये केंद्र सरकार की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी हैं. जब-जब किसी गैर भाजपाई राज्य में चुनाव नजदीक आता है, तभी अचानक छापेमारी, पूछताछ और गिरफ्तारियों की खबरें क्यों आने लगती हैं. पश्चिम बंगाल में I-PAC पर हुई कार्रवाई के बाद यही बहस फिर तेज हो गई है. लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह महज संयोग है या फिर नरेंद्र मोदी और अमित शाह के इशारे पर चल रही एजेंसियों का एक और उदाहरण. और सबसे बड़ा सवाल यह कि इन कार्रवाइयों का आखिर ठोस नतीजा क्या निकलता है. क्या अब तक ऐसी छापेमारियों से किसी बड़े मामले में सजा हुई है या यह सिर्फ चुनावी दबाव बनाने का तरीका है.

पश्चिम बंगाल में कोलकाता समेत छह ठिकानों और दिल्ली में चार ठिकानों पर ED की रेड
इसी पृष्ठभूमि में गुरुवार को इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की. प्रतीक जैन तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल के प्रमुख भी हैं. यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में कोलकाता समेत छह ठिकानों और दिल्ली में चार ठिकानों पर की गई. कोलकाता में छापेमारी के वक्त प्रतीक जैन घर पर ही मौजूद थे. सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई करीब साढ़े 11 बजे के बाद अचानक राजनीतिक तूफान में बदल गई.

गृह मंत्री के इशारे पर TMC के दस्तावेज जब्त?
सबसे पहले कोलकाता के पुलिस कमिश्नर प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचे. इसके कुछ देर बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं. ममता कुछ समय तक वहां रुकीं और जब बाहर निकलीं तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखी. इसके बाद वह सीधे I-PAC के दफ्तर पहुंचीं. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री के इशारे पर उनकी पार्टी के दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है.

कार्रवाई अवैध कोयला तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में
ED ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि I-PAC के कोलकाता कार्यालय पर की गई तलाशी पूरी तरह सबूतों के आधार पर है और इसका किसी राजनीतिक दल या चुनाव से कोई लेना देना नहीं है. एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई अवैध कोयला तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की जा रही है. ED ने बताया कि फिलहाल दस ठिकानों पर तलाशी जारी है जिनमें छह पश्चिम बंगाल और चार दिल्ली में हैं. एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान कैश जनरेशन और हवाला ट्रांसफर से जुड़े ठिकाने सामने आए हैं. ED ने यह भी साफ किया कि किसी भी पार्टी कार्यालय की तलाशी नहीं ली गई है.

ED ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
हालांकि ED ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोग दो ठिकानों पर पहुंचे और जांच में अवैध दखल देते हुए दस्तावेज अपने साथ ले गए. दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ED की फोरेंसिक टीम के खिलाफ FIR दर्ज कराने की बात कही है. इसके जवाब में ED ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस पूरे मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस सुवरा घोष की बेंच के सामने होनी है.

देश की सुरक्षा संभालने में नाकाम हैं गृह मंत्री
ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि क्या ED और अमित शाह का काम अब पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची जब्त करना रह गया है. ममता ने गृह मंत्री को शरारती बताते हुए कहा कि वह देश की सुरक्षा संभालने में नाकाम हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के सारे दस्तावेज उठाए जा रहे हैं. एक तरफ SIR के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो रही है और दूसरी तरफ इस तरह की छापेमारी कराई जा रही है.

गृह मंत्री को कंट्रोल करें प्रधानमंत्री
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि वे अपने गृह मंत्री को कंट्रोल करें. उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी उनसे राजनीतिक रूप से लड़ नहीं सकती तो बंगाल क्यों आ रही है. लोकतांत्रिक तरीके से हराने की चुनौती देते हुए ममता ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल उनकी पार्टी की रणनीति, वोटर्स और डेटा लूटने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि इस तरह की राजनीति का नतीजा यह होगा कि बीजेपी की सीटें घटते घटते शून्य पर आ जाएंगी.

मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली: सुवेंदु अधिकारी
वहीं बीजेपी ने ममता बनर्जी पर केंद्रीय एजेंसियों के काम में दखल देने का आरोप लगाया है. नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि वह छापेमारी पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली है. उन्होंने सवाल उठाया कि I-PAC के दफ्तर में वोटर लिस्ट क्यों मिली और क्या I-PAC किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यालय है. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

I-PAC चुनावी रणनीति में राजनीतिक दलों की करती है मदद
I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म है जो राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा आधारित कैंपेन, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में मदद करती है. इसकी शुरुआत साल 2013 में Citizens for Accountable Governance के नाम से प्रशांत किशोर और प्रतीक जैन ने की थी. बाद में इसका नाम बदलकर I-PAC रखा गया. 2014 के लोकसभा चुनाव में इसी टीम की रणनीति ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. उस वक्त प्रशांत किशोर बीजेपी के मुख्य रणनीतिकार माने जाते थे.

क्या यह कार्रवाई सच में कानून के तहत हो रही?
बाद में प्रशांत किशोर के अलग होने के बाद I-PAC की पूरी कमान प्रतीक जैन के हाथ में आ गई. प्रशांत किशोर ने आगे चलकर बिहार में जन सुराज पार्टी बनाई. I-PAC साल 2021 से तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर रही है. यही वजह है कि आज जब उसी I-PAC पर छापेमारी होती है जिसने कभी बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाया था, तो सवाल उठना लाजमी है. क्या यह कार्रवाई सच में कानून के तहत हो रही है या फिर चुनाव से पहले विपक्ष को घेरने की एक और कोशिश है. यही सवाल अब बंगाल की राजनीति के केंद्र में है.
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