Jharkhand News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि झारखंड में संचालित गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना देश की उन गिनी चुनी योजनाओं में शामिल है, जहां सबसे कम ब्याज दर पर सबसे अधिक शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है. 4 प्रतिशत ब्याज पर पंद्रह लाख रुपये तक का कर्ज देकर सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कमजोरी किसी भी बच्चे की पढ़ाई में बाधा न बने. दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती के अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ेगा झारखंड तभी बढ़ेगा झारखंड.
आर्थिक मजबूरी से बाहर निकालने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के गरीब तबके के कई युवा पैसों की कमी के कारण उच्च शिक्षा से दूर रह जाते हैं और मजबूरी में मजदूरी या पलायन का रास्ता चुनते हैं. शिक्षा ही वह जरिया है जो युवाओं को कुशल बनाकर आत्मनिर्भर बना सकती है. इसी सोच के साथ गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को सक्रिय रूप से लागू किया जा रहा है ताकि आदिवासी मूलवासी और वंचित वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके.
देश में सबसे कम ब्याज पर सबसे ज्यादा ऋण
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना इसलिए खास है क्योंकि इसमें देश में सबसे अधिक राशि सबसे कम ब्याज दर पर दी जा रही है. 4 प्रतिशत ब्याज पर 15 लाख रुपये तक का ऋण लेकर छात्र देश के किसी भी कोने में उच्च शिक्षा हासिल कर सकते हैं. सरकार का प्रयास सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है बल्कि युवाओं को इतना सक्षम बनाना है कि वे खुद के पैरों पर खड़े हो सकें.
आने वाले वर्षों को देखते हुए शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की योजनाएं आने वाले 30 वर्षों के झारखंड को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं. प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और आने वाले समय में वे खत्म हो सकते हैं. ऐसे में शिक्षित युवा ही राज्य का भविष्य संभाल पाएंगे और डॉक्टर इंजिनियर अधिकारी और उद्यमी बनकर समाज को आगे ले जाएंगे.
योजना की प्रमुख जानकारियां
गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत दो वर्ष पहले की गई थी. इसके तहत 4 प्रतिशत ब्याज दर पर शिक्षा ऋण दिया जा रहा है. अब तक 2430 लाभुकों को लगभग 200 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है. वर्तमान में पचपन लाभुकों को बारह करोड़ रुपये का ऋण दिया जा रहा है. योजना पूरी तरह डिजिटल है और पोर्टल के माध्यम से संचालित हो रही है. नौ बैंक इस योजना से जुड़े हैं. जानकारी और निगरानी के लिए डैशबोर्ड का उद्घाटन भी किया गया है. दो लाख से अधिक पंजीकरण हुए हैं जबकि लगभग पांच हजार आवेदन ऋण के लिए आए हैं. जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों में भी जानकारी देने की तैयारी है.
बैंकों की भूमिका पर भी मंथन
कार्यक्रम में मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि गुरुजी की शिक्षा 8वीं कक्षा तक ही हुई थी लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी सोच से ही ऐसी योजना की नींव पड़ी. उन्होंने कहा कि इस योजना में सरकार बैंक और छात्र तीनों की अहम भूमिका है. 9 बैंकों में से दो की ऋण वितरण दर बेहतर है जबकि सात बैंकों की प्रगति धीमी है. इस पर सरकार स्तर से मंथन किया जाएगा और समस्याओं को दूर किया जाएगा.
जागरूकता और बैंकों की सक्रिय भागीदारी बड़ी चुनौती
गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना झारखंड में शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाने की दिशा में मजबूत कदम है. कम ब्याज पर बड़ी राशि का ऋण गरीब और वंचित छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे खोल सकता है. हालांकि जागरूकता और बैंकों की सक्रिय भागीदारी बड़ी चुनौती है. यदि इन पहलुओं पर सुधार हुआ तो यह योजना झारखंड के मानव संसाधन को मजबूत करने में निर्णायक साबित हो सकती है.