Makar Sankranti: हिंदू शास्त्रों के अनुसार हर वर्ष 14 जनवरी को सूर्यदेव की उपासना के रूप में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व ठंडी सर्दियों के समापन और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। साथ ही यह नई फसल के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है।
2026 में सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे जानें
"मकर" का अर्थ मकर राशि से है। जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उसी क्षण को मकर संक्रांति कहा जाता है। वर्ष 2026 में सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा शुरू होती है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का समय माना गया है।
इस दिन खरमास का अंत हो जाता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी शुभ कार्यों की फिर से शुरुआत होती है। भक्त इस पावन अवसर पर सूर्यदेव के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, क्योंकि उन्हीं की कृपा से पृथ्वी पर जीवन संभव है।
इस वर्ष का विशेष संयोग
मकर संक्रांति 2026 इस बार कई दृष्टि से अत्यंत शुभ मानी जा रही है। 22 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जब मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं। इससे पहले ऐसा योग वर्ष 2023 में देखा गया था।
इसके साथ ही इस दिन दो अत्यंत शुभ योग भी बन रहे हैं
सर्वार्थ सिद्धि योग (जो हर कार्य में सफलता प्रदान करता है)
अमृत सिद्धि योग (जो श्रेष्ठ और अमृत समान फल देता है)
ये दोनों योग सुबह 7:15 बजे से अगले दिन सुबह 3:03 बजे तक प्रभावी रहेंगे, जिससे इस दिन किए गए दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
एकादशी और खिचड़ी दान को लेकर भ्रम
मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा है, लेकिन चूंकि इस बार यह पर्व एकादशी के दिन पड़ रहा है, इसलिए लोगों के मन में भ्रम बना हुआ है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, विष्णु पुराण में एकादशी के दिन चावल दान करने की कोई स्पष्ट मनाही नहीं है। अतः आप इस दिन खिचड़ी दान कर सकते हैं।
हालांकि, यदि आप एकादशी का व्रत रखते हैं, तो 14 जनवरी को खिचड़ी न खाएं। ऐसे में आप 15 जनवरी (द्वादशी) को खिचड़ी खा सकते हैं और दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
संक्रांति के दिन तिल, गुड़, वस्त्र और अन्य अनाज का दान करना श्रेष्ठ फल देता है।
स्नान-दान का शुभ समय
मकर संक्रांति 2026 – बुधवार, 14 जनवरी
स्नान-दान का शुभ समय: सुबह 7:15 बजे से शाम 5:45 बजे तक
महापुण्य काल: सुबह 7:15 से 9:00 बजे तक
पुण्य काल: दोपहर 3:13 से शाम 5:19 बजे तक
महा पुण्य काल: शाम 3:59 से 5:19 बजे तक
दान का महत्व
मकर संक्रांति ऐसा पर्व है जब सूर्यदेव और शनिदेव दोनों को एक साथ प्रसन्न किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और पात्र का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं, स्वास्थ्य लाभ होता है और रोगों से मुक्ति मिलती है।
इसी कारण लोग इस पावन दिन पूरे उत्साह के साथ दान-पुण्य और धार्मिक कार्य करते हैं।