National News: देशभर में स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की 18,000 से अधिक सीटें खाली रहने के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान बोर्ड ने NEET-PG 2025 के लिए योग्यता प्रतिशत में बदलाव किया है. बोर्ड ने आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए कटऑफ को 40 प्रतिशत से घटाकर 0 प्रतिशत कर दिया है. वहीं सामान्य वर्ग के लिए कटऑफ 50 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत तय किया गया है. यह जानकारी मंगलवार को जारी आधिकारिक नोटिस में दी गई.
दूसरे चरण की काउंसिलिंग के बाद हुआ संशोधन
यह निर्णय दूसरे चरण की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद लिया गया. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इसका मकसद उपलब्ध सीटों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है. सूत्रों का कहना है कि मेडिकल पीजी सीटों का खाली रहना न केवल शैक्षणिक संसाधनों की बर्बादी है बल्कि देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों को भी कमजोर करता है.
सीटें खाली रहने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर
सूत्रों ने बताया कि पहले लागू प्रतिशत सीमा के कारण बड़ी संख्या में सीटें उपलब्ध होने के बावजूद योग्य उम्मीदवारों का दायरा सीमित रह गया था. NEET-PG एक ऐसी रैंकिंग प्रणाली है, जिसके जरिए केंद्रीकृत काउंसिलिंग के माध्यम से पारदर्शी और मेरिट आधारित सीट आवंटन किया जाता है. कटऑफ में संशोधन से अब ज्यादा उम्मीदवारों को अवसर मिलने की संभावना है.
मेरिट और रैंक के आधार पर ही होगा प्रवेश
बोर्ड की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रवेश पूरी तरह NEET-PG रैंक और उम्मीदवारों की प्राथमिकताओं के आधार पर ही होगा. सीटों का आवंटन केवल अधिकृत काउंसिलिंग प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा. किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या विवेकाधीन प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक शैक्षणिक मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया है और संशोधित कटऑफ केवल पात्रता के दायरे का विस्तार है.
आईएमए की मांग के बाद बढ़ी उम्मीदें
इस फैसले से पहले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 12 जनवरी को औपचारिक रूप से योग्यता कटऑफ में संशोधन की मांग की थी. आईएमए ने सीटों की बर्बादी रोकने और देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया था. बोर्ड का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखी जाएगी.
कटऑफ में संशोधन से स्वास्थ्य क्षेत्र को फायदा
NEET-PG 2025 के लिए कटऑफ में यह बड़ी छूट मेडिकल शिक्षा के स्तर पर एक व्यावहारिक कदम मानी जा रही है. बड़ी संख्या में सीटें खाली रहना जहां सिस्टम की कमजोरी को दिखाता है, वहीं कटऑफ में संशोधन से स्वास्थ्य क्षेत्र को लंबे समय में फायदा मिलने की उम्मीद है. अब निगाहें राउंड 3 काउंसिलिंग पर टिकी हैं, जहां यह फैसला जमीन पर कितना असर दिखाता है, यह साफ होगा.