Jharkhand News: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पेयजल विभाग के क्लर्क संतोष कुमार द्वारा प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष दर्ज कराए गए बयान ने विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों की परेशानी बढ़ा दी है. संतोष कुमार ने पीएमएलए की धारा 50 के तहत दिए बयान में विभाग में कथित रूप से चल रही कमीशनखोरी की परंपरा और अपने बैंक खाते के माध्यम से की गई 23 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी से जुड़े बंटवारे का विस्तृत उल्लेख किया है. इस बयान के आधार पर आगे की जांच जारी है और इससे विभाग के तत्कालीन सचिव सहित अन्य अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
जांच एजेंसियों ने संतोष को मुख्य अभियुक्त माना
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पुलिस और ED दोनों जांच एजेंसियों ने संतोष कुमार को इस मामले में मुख्य अभियुक्त के रूप में चिह्नित किया है. जांच के दौरान ED ने संतोष के खातों के जरिए 23 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी का खुलासा किया था. इसके बाद उससे पूछताछ कर उसका बयान दर्ज किया गया.
कमीशनखोरी की कथित संरचना आई सामने
संतोष कुमार के बयान के अनुसार विभाग में टेंडर की कुल राशि का करीब 10 प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कथित कमीशन में मंत्री की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत बताई गई है. वहीं सचिव का हिस्सा 1.50 प्रतिशत से 2.00 प्रतिशत तक होने का दावा किया गया है. शेष करीब 3 प्रतिशत राशि इंजीनियरों और अन्य अधिकारियों के बीच बांटे जाने की बात कही गई है.
23 करोड़ में से 12 करोड़ के बंटवारे का दावा
बयान में यह भी कहा गया है कि 23 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी में से 12 करोड़ रुपये नकद निकाले गए और अलग-अलग लोगों के बीच बांटे गए. संतोष ने अपने बयान में तत्कालीन कार्यपालक अभियंताओं के अलावा कोषागार से जुड़े पदाधिकारियों को दी गई राशि का भी उल्लेख किया है.
वित्त विभाग की जांच और कार्रवाई का जिक्र
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वित्त विभाग ने भी इस निकासी की जांच कराई थी. जांच के बाद ट्रेजरी से जुड़े अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था. वहीं पेयजल विभाग ने इस मामले में डीडीओ के रूप में कार्य कर रहे तत्कालीन कार्यपालक अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की थी.
12 करोड़ रुपये के कथित बंटवारे का विवरण
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संतोष के बयान के अनुसार प्रभात कुमार सिंह को 1.75 करोड़ रुपये, चंद्रशेखर को 3.00 करोड़ रुपये, राधेश्याम रवि को 1.00 करोड़ रुपये, निरंजन कुमार को 80 लाख रुपये, परमानंद कुमार को 1.00 करोड़ रुपये, सुनील कुमार सिन्हा को 85 लाख रुपये, सुरेंद्र पाल मिंज को 30 लाख रुपये, मनोज कुमार को 15 लाख रुपये, संजय कुमार को 10 लाख रुपये, और रंजन कुमार सिंह को 7 लाख रुपये दिए गए.
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आए संतोष कुमार के बयान ने पेयजल घोटाले की जांच को और गंभीर मोड़ पर ला दिया है. कमीशनखोरी के कथित सिस्टम और करोड़ों रुपये के बंटवारे के दावे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं. अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किन पर तय होती है.