West Singhbhum: पश्चिम सिंहभूम जिले में पुलिस ने एक शातिर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों के मन में पुलिस की वर्दी का डर और सोशल मीडिया पर बनाई गई फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर उन्हें अपना शिकार बना रहा था। यह गिरोह खुद को सीआईडी का अधिकारी बताकर लोगों से उगाही करता था और व्हाट्सएप पर बड़े पुलिस अधिकारियों की प्रोफाइल फोटो लगाकर भरोसा और खौफ दोनों पैदा करता था।
फर्जी पुलिस बनकर घूम रहे थे अपराधी
इस गिरोह का मुख्य सरगना रोशन एक्का (उम्र लगभग 38 वर्ष) और उसका एक नाबालिग सहयोगी मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के टुंगरी पुल के पास पुलिस के हत्थे चढ़े। दोनों आरोपी एक ऐसी मोटरसाइकिल से घूम रहे थे, जिस पर पुलिस का फर्जी लोगो लगा हुआ था। इतना ही नहीं, बाइक पर फर्जी नंबर प्लेट (JH06Q 8055) लगाई गई थी, जबकि तलाशी के दौरान सीट के नीचे से असली नंबर प्लेट (JH06Q 3520) भी बरामद हुई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वारदात को अंजाम देने के बाद वे नंबर प्लेट बदल लिया करते थे ताकि पहचान छिपाई जा सके।
CID इंस्पेक्टर बताकर की थी उगाही
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि करीब दो महीने पहले उन्होंने नोवामुंडी थाना क्षेत्र के डांगोवापोसी इलाके में खुद को सीआईडी इंस्पेक्टर बताकर विक्की कुमार गोप नामक व्यक्ति को डराया-धमकाया और उससे मोटी रकम की ठगी की थी। गिरोह की कार्यशैली बहुत चालाक थी। ये लोग मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तस्वीरें डीपी में लगाते थे और खुद को उच्च पदस्थ अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक दबाव में ले आते थे।
पुराना अपराधी निकला मास्टरमाइंड
पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि गिरफ्तार रोशन एक्का कोई नया अपराधी नहीं है। वह वर्ष 2004 में हुए अपहरण और हत्या के एक गंभीर मामले (कांड संख्या 114/2004) में दोषी ठहराया जा चुका है और जेल की सजा भी काट चुका है। जेल से रिहा होने के बाद उसने अपराध का तरीका बदल लिया और फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने का नया रास्ता अपना लिया।
बरामद सामान
- गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई आपत्तिजनक और आपराधिक सामग्री जब्त की है, जिनमें शामिल हैं:
- पुलिस का फर्जी लोगो लगी एसपी शाइन मोटरसाइकिल
- तीन एंड्रॉइड मोबाइल फोन, जिनका इस्तेमाल ठगी और धमकी देने में किया जाता था
- फर्जी नंबर प्लेट
- आधार कार्ड और पैन कार्ड की छायाप्रतियां
- पुलिस टीम की सतर्कता से मिली सफलता
इस पूरे मामले का खुलासा पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से संभव हो सका। इस टीम का नेतृत्व सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बहामन टुटी कर रहे थे, जबकि मुफ्फसिल थाना प्रभारी विनोद कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने अहम भूमिका निभाई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी हुई है कि इस गिरोह ने जिले और आसपास के इलाकों में और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इनके पीछे कोई और नेटवर्क या सहयोगी तो नहीं हैं।