Jharkhand News: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद आदित्य साहू शनिवार को सिलदीरी शंकर घाट पहुंचे और 55 दिनों से लापता कन्हैया कुमार के परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय बाद भी कोई सुराग नहीं मिलना बेहद पीड़ादायक और गंभीर चिंता का विषय है. आदित्य साहू ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और कहा कि यह केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए सवाल है. इस दौरान उन्होंने परिवार को खाद्य सामग्री और कंबल सहित आवश्यक राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई.
परिजनों को आर्थिक सहयोग का आश्वासन
आदित्य साहू ने कन्हैया कुमार के बड़े भाई के इलाज के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से एक लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और हरसंभव मदद दी जाएगी.
राज्य में बिगड़ती विधि व्यवस्था पर सवाल
आदित्य साहू ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि झारखंड में विधि व्यवस्था की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है. पुलिस प्रशासन को आम जनता, गांव गरीब और किसानों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है. एक ओर जल जंगल जमीन की खुलेआम लूट हो रही है, वहीं दूसरी ओर अपहरण और बच्चा चोर गिरोह सक्रिय हैं.
बच्चा तस्करी का शिकार रहा है झारखंड
उन्होंने कहा कि झारखंड पहले से ही चाइल्ड ट्रैफिकिंग का शिकार रहा है. पिछले चार वर्षों में राज्य से 413 बच्चे लापता हुए हैं, जिनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला. यह आंकड़े प्रशासन की विफलता को उजागर करते हैं और सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करते हैं.
एसएसपी से की बात, रांची बंद की चेतावनी
आदित्य साहू ने रांची एसएसपी से फोन पर बातचीत कर कन्हैया कुमार की अविलंब खोज और बरामदगी की मांग की. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर मासूम कन्हैया को ढूंढने में प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं करता है, तो रांची बंद का आह्वान किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई न्याय, संवेदनशीलता और मानवीय सरोकार की है और जब तक मासूम को न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा.
यह मामला केवल लापता होने का नहीं, बल्कि झारखंड में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता की गंभीर परीक्षा बन गया है. आदित्य साहू के बयान और चेतावनी से साफ है कि बच्चा चोरी और अपहरण जैसे मामलों को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने वाला है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस चुनौती को कितनी गंभीरता से लेता है और लापता बच्चों के मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है.