जानिए क्या है पूरा मामला
मृतकों की पहचान 40 वर्षीय पुतुल देवी और उनकी 16 वर्षीय पुत्री स्नेहा कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पुतुल देवी ने किसी महिला स्वयं सहायता समूह से लगभग 5 लाख रुपये का लोन लिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भारी-भरकम कर्ज की जानकारी उन्होंने अपने परिवार के अन्य सदस्यों को नहीं दी थी।
मानसिक तनाव में थी माँ
बताया जा रहा है कि लोन की किस्तों को चुकाने के लिए पिछले कुछ समय से पुतुल देवी के पास लगातार फोन आ रहे थे। आर्थिक तंगी और लोक-लाज के डर से वह गहरे मानसिक तनाव में रहने लगी थीं। परिजनों का कहना है कि वह अक्सर रोती रहती थीं, लेकिन पूछने पर भी उन्होंने कभी अपनी समस्या साझा नहीं की। सोमवार की सुबह जब देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका में दरवाजा तोड़ा। अंदर का मंजर देख सबकी रूह कांप गई; माँ और बेटी दोनों फंदे से लटके हुए थे।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ जीतवाहन उरांव और मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल भेज दिया है।
पुलिस हर संभावित एंगल से मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने कहा प्राथमिक तौर पर यह कर्ज से परेशान होकर उठाया गया कदम लग रहा है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जीतवाहन उरांव, सदर एसडीपीओ
इस घटना ने एक बार फिर माइक्रोफाइनेंस और निजी लोन समूहों के दबाव और उससे उपजे मानसिक तनाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।