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  • 2026-01-20

Jamshedpur News: जमशेदपुर में अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर, 24 भवनों पर कार्रवाई की तैयारी

Jamshedpur News: जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति यानी JNAC क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई की रफ्तार बढ़ा दी है. नक्शा उल्लंघन से जुड़े 24 भवनों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे अगले दो दिनों के भीतर जिला प्रशासन को सौंपा जा सकता है. जेएनएसी की टीम मौके पर पहुंचकर अवैध हिस्सों को चिह्नित कर रही है, ताकि आगे की कार्रवाई स्पष्ट और प्रभावी तरीके से की जा सके.

उपायुक्त के निर्देश पर तैयार हो रही रिपोर्ट
बीते दिनों उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में हुई बैठक में जेएनएसी को तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था. इसी क्रम में एटीएम के नेतृत्व में टीम लगातार स्थल निरीक्षण कर रही है. गुरुवार या शुक्रवार तक रिपोर्ट पूरी होने की संभावना जताई जा रही है.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई प्रक्रिया
यह पूरी कार्रवाई एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई है. अदालत ने अवैध निर्माण को एक माह के भीतर ध्वस्त करने का स्पष्ट आदेश दिया है. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने की थी.

72 अवैध फ्लोर तोड़े जाने की संभावना
जेएनएसी सूत्रों के अनुसार जिन 24 भवनों की जांच चल रही है, उनमें करीब 72 अवैध फ्लोर पाए गए हैं. लीज क्षेत्र में 2 प्लस जी तक ही निर्माण की अनुमति है, जबकि कई भवनों में पांच से छह मंजिल तक निर्माण किया गया है. नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में है.

अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
हाईकोर्ट ने आदेश के अनुपालन में किसी भी तरह की ढिलाई पर नगर विकास सचिव, उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है. अधिवक्ताओं की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में निर्माण को अवैध बताते हुए भवन उपनियमों के उल्लंघन और अधिकारियों की लापरवाही की ओर भी इशारा किया है.

25 फरवरी तक देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
जेएनएसी के उप नगर आयुक्त को 25 फरवरी तक अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को तय की गई है.

अवैध निर्माण पर यह कार्रवाई केवल भवन तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और शहरी नियोजन की सख्ती का संकेत भी है. हाईकोर्ट की निगरानी में हो रही प्रक्रिया से यह स्पष्ट है कि अब नियमों की अनदेखी पर राहत की गुंजाइश कम होती जा रही है. आने वाले दिनों में यह अभियान शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ एक मजबूत संदेश दे सकता है.
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