Jharkhand: अवैध पत्थर खनन से जुड़े मामले में सीबीआई जांच शुरू होने के बाद झारखंड की राजनीति में उबाल आ गया है। इस मुद्दे को लेकर राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर तीखे और गंभीर आरोप लगाए हैं। मरांडी का कहना है कि सीबीआई जांच से घबराए सत्ताधारी दल के नेता और कार्यकर्ता अब खुलेआम दबंगई और अराजकता का सहारा ले रहे हैं।
बाबूलाल मरांडी ने लगाए झामुमो पर आरोप
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने बयान में दावा किया कि पिछले कई दिनों से साहिबगंज जिले में रेलवे के माध्यम से होने वाली पत्थरों की ढुलाई को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम झामुमो के स्थानीय और तथाकथित छुटभैये नेताओं द्वारा किया जा रहा है, ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके और अवैध गतिविधियों पर पर्दा डाला जा सके।
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ वे विदेश यात्रा पर जाकर राज्य में निवेश आकर्षित करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके संरक्षण में राज्य के भीतर कानून-व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं राज्य में अराजक माहौल पैदा कर रही हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।
नेता प्रतिपक्ष ने दी चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी चेतावनी दी कि यदि यही हालात बने रहे तो झारखंड में कोई भी निवेशक पैसा लगाने की हिम्मत नहीं करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंकज मिश्रा, पूजा सिंघल, छवि रंजन, विनय चौबे और मिथिलेश ठाकुर जैसे लोगों को बचाने का जो प्रयास किया गया है, उसका हिसाब जरूर होगा।
मरांडी ने अपने बयान में साफ शब्दों में कहा कि चाहे ईडी कार्यालय का घेराव किया जाए या सीबीआई जांच को प्रभावित करने के लिए पत्थर ढुलाई रोकी जाए, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि आखिर में सच सामने आएगा और दोषियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगा।