Jharkhand News: झारखंड में बियार जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर एक बार फिर प्रक्रिया आगे बढ़ी है. राज्य में बियार समुदाय पर नया सर्वे और अध्ययन कराया जाएगा. समुदाय का दावा है कि झारखंड में इनकी आबादी करीब 50 हजार है और उनकी सामाजिक परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान आसपास रहने वाले जनजातीय समाज से मेल खाती हैं. इसी आधार पर लंबे समय से एसटी दर्जे की मांग की जा रही है.
छह महीने में पूरा होगा अध्ययन
यह सर्वे झारखंड के डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान की निगरानी में चयनित एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा. पूरी प्रक्रिया छह महीने में पूरी करने की तैयारी है. इसके लिए ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से निविदा भी जारी कर दी गई है.
फिलहाल ओबीसी सूची में शामिल है समुदाय
बियार समाज के लोग मुख्य रूप से सब्जी और फल के व्यापार से जुड़े हुए हैं. समुदाय खुद को भूमिहीन बताता है और स्थायी आय के अभाव में कई परिवारों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है. झारखंड में यह समाज खासतौर पर बिहार से सटे जिलों में निवास करता है. वर्तमान में बियार समुदाय राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में शामिल है.
संस्कृति और सामाजिक ढांचे पर होगा फोकस
सर्वे के दौरान समुदाय की उत्पत्ति, नामकरण और नस्लीय संरचना से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी. इसके साथ ही धार्मिक मान्यताओं, रीति रिवाजों, त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण किया जाएगा. समुदाय में प्रचलित भाषाओं और बोलियों का भाषाई वर्गीकरण भी अध्ययन का हिस्सा होगा.
आवास और आजीविका की स्थिति का आकलन
अध्ययन में बियार समाज की सामाजिक संरचना, गांव के भीतर सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी, प्रमुख आवासीय क्षेत्र और जनसंख्या से जुड़ी जानकारी शामिल की जाएगी. इसके साथ ही आजीविका के प्रमुख साधनों और सामाजिक परिस्थितियों पर भी रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
केंद्र सरकार के मानकों पर तैयार होगी रिपोर्ट
पूरा सर्वे भारत सरकार द्वारा तय पांच मापदंडों के आधार पर किया जाएगा. इनमें विशिष्ट संस्कृति, भौगोलिक अलगाव, समुदाय के साथ संपर्क में संकोच, आदिम लक्षणों के संकेत और सामाजिक शैक्षणिक व आर्थिक पिछड़ापन शामिल हैं. इन्हीं बिंदुओं के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
बियार समाज पर दोबारा शुरू हुआ यह अध्ययन झारखंड की सामाजिक संरचना के लिए अहम माना जा रहा है. यदि सर्वे में समुदाय जनजातीय मानकों पर खरा उतरता है तो एसटी दर्जे की दिशा में यह बड़ा कदम हो सकता है. वहीं रिपोर्ट के निष्कर्ष राज्य और केंद्र स्तर पर आगे के फैसलों की नींव तय करेंगे.