Jharkhand News: चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में झारखंड सरकार ने विभिन्न विभागों और योजनाओं के लिए अब तक 94,744 करोड़ 02 लाख 48 हजार 720 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है. हालांकि, खर्च की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है. राज्य मद से जुड़ी योजनाओं में अब तक 65,544 करोड़ 56 लाख 37 हजार 752 रुपये खर्च किए गए हैं, जो कुल स्वीकृत राशि का 49.07 प्रतिशत है.
राज्य का कुल बजट 1 लाख 45 हजार 400 करोड़ रुपये का है. इसमें से राज्य योजना के तहत 1 लाख 33 हजार 577 करोड़ रुपये निर्धारित हैं. वहीं केंद्रीय योजनाओं में अब तक केवल 24.47 प्रतिशत राशि ही खर्च हो सकी है. कुल मिलाकर देखा जाए तो पूरे बजट का सिर्फ 46.05 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक उपयोग में लाया जा सका है.
किन विभागों को कितनी राशि की स्वीकृति
सरकार द्वारा सबसे अधिक राशि महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को दी गई है. इस विभाग को 23,914 करोड़ 96 लाख 16 हजार रुपये की स्वीकृति मिली है. इसके बाद प्राथमिक शिक्षा को 10,930 करोड़ 68 लाख 90 हजार 620 रुपये और ग्रामीण विकास विभाग को 10,672 करोड़ 03 लाख 21 हजार रुपये दिए गए हैं.
अन्य प्रमुख विभागों में:
• स्वास्थ्य विभाग को 6,286 करोड़ 17 लाख 43 हजार 038 रुपये.
• पथ निर्माण विभाग को 5,416 करोड़ 12 लाख 99 हजार रुपये.
• ग्रामीण कार्य विभाग को 4,557 करोड़ 20 लाख 66 हजार रुपये.
• खाद्य आपूर्ति विभाग को 2,680 करोड़ 60 लाख 51 हजार 100 रुपये.
• एसटी-एससी व पिछड़ा वर्ग कल्याण को 2,718 करोड़ 47 लाख 39 हजार 400 रुपये.
• वन एवं पर्यावरण विभाग को 1,444 करोड़ 71 लाख 42 हजार रुपये.
• नगर विकास विभाग को 1,335 करोड़ 84 लाख 35 हजार 215 रुपये की स्वीकृति दी गई है.
शिक्षा, सिंचाई और आधारभूत ढांचे पर जोर
शिक्षा से जुड़े विभागों में माध्यमिक शिक्षा को 1,341 करोड़ 27 लाख 65 हजार 289 रुपये, जबकि उच्च शिक्षा को 309 करोड़ 54 लाख 85 हजार 633 रुपये मिले हैं.
जल संसाधन विभाग को 1,893 करोड़ 20 लाख 75 हजार 811 रुपये, लघु सिंचाई को 427 करोड़ 58 लाख 83 हजार 059 रुपये और पेयजल एवं स्वच्छता को 958 करोड़ 80 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है.
अन्य विभागों को मिली राशि
• ऊर्जा विभाग: 7,700 करोड़ 48 लाख 73 हजार 109 रुपये.
• आपदा प्रबंधन: 1,051 करोड़ 42 लाख 41 हजार 702 रुपये.
• गृह विभाग: 939 करोड़ 12 लाख 12 हजार 259 रुपये.
• श्रम विभाग: 922 करोड़ 45 लाख 25 हजार रुपये
• कृषि विभाग: 1,880 करोड़ 65 लाख 79 हजार 864 रुपये.
• पशुपालन: 191 करोड़ 04 लाख 88 हजार रुपये.
• पर्यटन: 234 करोड़ 01 लाख 97 हजार 414 रुपये.
• सूचना प्रौद्योगिकी: 73 करोड़ 31 लाख 00 हजार 736 रुपये.
• पंचायती राज: 1,099 करोड़ 57 लाख 79 हजार रुपये.
आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने स्वीकृति के स्तर पर कई अहम विभागों को बड़ी राशि दी है, लेकिन खर्च की गति अभी भी आधे से नीचे है. आने वाले महीनों में योजनाओं के क्रियान्वयन और बजट खर्च में तेजी लाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहेगा.