Jharkhand News: रांची के जगन्नाथपुर खटाल से अगवा दो बच्चों की बरामदगी के बाद पुलिस ने जांच को और तेज कर दिया है. इस मामले की तफ्तीश के दौरान रांची समेत राज्य के अलग-अलग इलाकों से कुल 52 बच्चों को बरामद किया गया है. इनमें से 40 बच्चों पर 50 से अधिक लोगों ने दावा कर दिया है. कोई खुद को बच्चों का चाचा बता रहा है तो कोई मौसेरा भाई बनकर सामने आ रहा है. ऐसे में पुलिस ने बच्चों और दावेदारों का डीएनए टेस्ट कराने का फैसला लिया है. इसके लिए कोर्ट से अनुमति भी मिल चुकी है.
डीएनए रिपोर्ट के बाद ही सौंपे जाएंगे बच्चे
पुलिस अधिकारियों के अनुसार डीएनए जांच पूरी होने के बाद ही बच्चों को उनके असली परिजनों को सौंपा जाएगा. बरामद बच्चों को लेकर लगातार लोग थाना और शेल्टर होम पहुंच रहे हैं और किसी न किसी तरह से अपनी दावेदारी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने तक बच्चों को सुरक्षित रखा जाएगा.
आरोपियों की निशानदेही पर बरामद हुए बच्चे
पुलिस ने अंश और अंशिका अपहरण मामले में आरोपी नव खेरवार और सोनी को गिरफ्तार किया था. उनकी निशानदेही पर अन्य बच्चा चोरों को भी पकड़ा गया. गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी के आधार पर पुलिस ने 40 बच्चों को अलग-अलग इलाकों से बरामद किया है.
बच्चा चोर गिरोह की संपत्ति जब्ती की तैयारी
रांची पुलिस बच्चा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी में जुट गई है. मुख्य आरोपी खेरवार, प्रमोद कुमार, आशिक गोप और बेबी देवी सिल्ली के नवाडीह टुटकी में सिल्ली कॉलेज के पास रहते थे. जिस घर में आरोपी रहते थे, वह करीब 17 डिसमिल जमीन पर बना हुआ है. वहां बने कुछ मकानों में टाइल्स और मार्बल भी लगे हुए हैं. अनुराग का एक मकान रामगढ़ में भी बताया जा रहा है. पुलिस यह पता कर रही है कि जिस जमीन पर आरोपी रहते थे, उसका मालिक कौन है. लातेहार और रामगढ़ से गिरफ्तार आरोपियों की संपत्ति की भी जांच की जा रही है. पुलिस को आशंका है कि बच्चा चोरी और बिक्री से मिली रकम से जमीन और मकान खरीदे गए होंगे.
12 बच्चों पर कोई दावा नहीं, पोर्टल पर डाला गया विवरण
पुलिस ने बोकारो, रामगढ़ और सिल्ली सहित अन्य इलाकों से जिन 12 बच्चों को बरामद किया है, उन पर अब तक किसी ने दावा नहीं किया है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार न तो कोई व्यक्ति थाना पहुंचा है और न ही शेल्टर होम में इन बच्चों को लेने आया है. रांची पुलिस ने इन 12 बच्चों की तस्वीर और विवरण वात्सल्य पोर्टल पर अपलोड कर दिया है. अधिकारियों ने बताया कि इन बच्चों का प्रचार प्रसार नहीं किया जा सकता है. वात्सल्य पोर्टल विशेष रूप से लापता बच्चों की पहचान के लिए बनाया गया है.
डीएनए जांच का फैसला बच्चों की सही पहचान और सुरक्षा के लिहाज से अहम
बड़ी संख्या में बच्चों की बरामदगी और उन पर कई दावेदारों का सामने आना इस मामले को जटिल बना रहा है. डीएनए जांच का फैसला बच्चों की सही पहचान और सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है. वहीं आरोपियों की संपत्ति की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बच्चा चोरी के पीछे संगठित गिरोह किस स्तर तक फैला हुआ था.